Religious Reform Movement

( सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आन्दोलन )

19वी सदी को भारत में धार्मिक एवं सामाजिक पुनर्जागरण की सदी माना गया है।

राजा राम मोहन रॉय एवं ब्रह्म समाज

राजा राममोहन राय को भारतीय नवजागरण का अग्रदूत कहा जाता है। इनका जन्म 22 मई, 1772 को बंगाल के हुगली जिले मेँ स्थित राधानगर मेँ हुआ था। राजा राममोहन राय पहले भारतीय थे जिन्होंने ने सर्वप्रथम भारतीय समाज मेँ व्याप्त धार्मिक और सामाजिक बुराइयोँ को दूर करने के लिए आंदोलन किया।

राजा राममोहन राय मानवतावादी थे उनकी विश्व बंधुत्व में घोर आस्था थी। ये जीवन की स्वतंत्रता तथा संपत्ति ग्रहण करने के लिए प्राकृतिक अधिकारोँ के समर्थक थे। राजा राम मोहन राय ने 1815 मेँ कलकत्ता मेँ आत्मीय सभा की स्थापना करके हिंदू धर्म की बुराइयोँ पर प्रहार किया।

राजा राममोहन राय एकेश्वरवादी थे। उन्होंने इस संस्था के माध्यम से एकेश्वरवाद का प्रचार-प्रसार किया। सन् 1828 मेँ राजा राम मोहन राय ने कोलकाता मेँ ब्रह्म सभा की नामक एक संस्था की स्थापना की  जिसे बाद मेँ ब्रह्म समाज का नाम दे दिया गया।

राजा राममोहन राय ने अपने संगठन ब्रहम समाज के माध्यम से हिंदू समाज मेँ व्याप्त सती-प्रथा, बहुपत्नी प्रथा, वेश्यागमन, जातिप्रथा आदि बुराइयोँ के विरोध मेँ संघर्ष किया। विधवा पुनर्विवाह का इन्होने समर्थन किया। ब्रहम समाज ने जाति प्रथा पर प्रहार किया तथा स्त्री पुरुष समानता पर बल दिया।

धार्मिक क्षेत्र मेँ इन्होंने मूर्तिपूजा की आलोचना करते हुए अपने पक्ष को वेदोक्तियों के माध्यम से सिद्ध करने का प्रयास किया। इनका मुख्य उद्देश्य भारतीयों को वेदांत के सत्य का दर्शन कराना था। राजा राम मोहन राय के विचारोँ से प्रभावित होकर देवेंद्र नाथ टैगोर ने 1843 मेँ ब्रह्म समाज की सदस्यता ग्रहण की।

ब्रहम समाज मेँ शामिल होने से पूर्व देवेंद्र नाथ टैगोर ने तत्वबोधिनी सभा (1839) का गठन किया था। 1857 मेँ केशव चंद्र सेन ब्रहम समाज के आचार्य नियुक्त किये गए।

दयानंद सरस्वती और आर्य समाज

आर्य समाज के संस्थापक दयानंद सरस्वती थे इन्होंने 1857 मेँ बंबई मेँ आर्य समाज की स्थापना की। दयानंद के बचपन का नाम मूल संकर था।इनका जन्म 1824 मेँ गुजरात की मोर्वी रियासत के एक ब्राम्हण परिवार मेँ हुआ था। इनके गुरु विरजानंद थे। तथा वैदिक समाज से बहुत प्रभावित हुये।

ये एक ईश्वर मेँ विश्वास करते थे मूर्तिपूजा पुरोहितवाद तथा कर्मकांडोँ का विरोध करते थे इसलिए उनहोने वेदो की और लौटो का नारा दिया।दयानंद सरस्वती ने जाति व्यवस्था, बाल विवाह, समुद्री यात्रा निषेध के विरुद्ध आवाज बुलंद की तथा स्त्री शिक्षा, विधवा विवाह आदि को प्रोत्साहित किया।

स्वामी दयानंद ने शुद्धि आंदोलन चलाया। इस आंदोलन ने उन लोगोँ के लिए हिंदू धर्म के दरवाजे खोल दिए जिन्होंने हिंदू धर्म का परित्याग कर दूसरे धर्मों को अपना लिया था। स्वामी दयानंद ने अनेक पुस्तको की रचनाकी, किंतु सत्यार्थ प्रकाश और पाखंड खंडन उन की महत्वपूर्ण रचनाएँ हैं।

आर्य समाज की स्थापना का मूल उद्देश्य देश मेँ व्याप्त धार्मिक और सामाजिक बुराइयोँ को दूर कर वैदिक धर्म की पुनः स्थापना कर भारत को सामाजिक, धार्मिक व राजनीतिक रुप से एक सूत्र मेँ बांधना था। स्वामी दयानंद ने शूद्रों तथा स्त्रियोँ को वेद पढ़ने, ऊँची शिक्षा प्राप्त करने तथा यज्ञोपवीत धारण करने के पक्ष मेँ आंदोलन किया।

स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण मिशन

स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना 1897 में अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस की स्मृति में की थी। राम कृष्ण परम हंस कलकत्ता के दक्षिणेश्वर स्थित काली मंदिर के पुजारी थे, जिंहोने चिंतन, सन्यास और भक्ति के परंपरागत तरीको में धार्मिक मुक्ति प्राप्त करने का प्रयास किया।

राम कृष्ण मूर्ति पूजा में विश्वास रखते थे और उसे शाश्वत, सर्वशक्तिमान ईश्वर को प्राप्त करने का साधन मानते थे। 1886 में रामकृष्ण परमहंस की मृत्यु के बाद विवेकानंद ने अपने गुरु संदेशों प्रचार-प्रसार का उत्तरदायित्व संभाला।

विवेकानंद के बचपन का नाम नरेंद्र था। इनका जन्म बंगाल के एक कायस्थ परिवार में हुआ था। सितंबर, 1893 में अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में विवेकानंद ने भारत का नेतृत्व किया।

विवेकानंद ने कहा था, “ मैं ऐसे धर्म को नहीं मानता जो विधवाओं आंसू नहीं पोंछ सके या किसी अनाथ को एक टुकड़ा रोटी भी ना दे सके।“

भारत में व्याप्त धार्मिक अंधविश्वास के बारे में स्वामी जी ने अपने विचार इस प्रकार अभिव्यक्त किये, “हमारा धर्म रसोईघर में है, हमारा ईश्वर खाना बनाने के बर्तन में है, और हमारा धर्म है मुझे मत छुओ मैं अपवित्र हूँ, यदि एक शताब्दी तक यह सब चलता रहा तो हम सब पागलखाने में होंगे।“

सुभाष चंद्र बोस ने स्वामी विवेकानंद को आधुनिक राष्ट्रीय आंदोलन का आध्यात्मिक पिता कहा था।

विवेकानंद ने कोई राजनीतिक संदेश नहीं दिया था। परंतु फिर भी उन्होनें अपने लेखों तथा भाषणों के द्वारा नई पीढ़ी में राष्ट्रीयता और आत्मगौरव की भावना का संचार किया। वलेंटाइन चिरोल ने विवेकानंद के उद्देश्यों को भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का एक प्रमुख कारण माना।

एनी बेसेंट और थियोसोफिकल सोसाइटी

थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना 1875 में मैडम एच. पी. ब्लावेट्स्की और हेनरी स्टील आलकॉट द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका में की गई थी। इस सोसाइटी ने हिंदू धर्म को विश्व का सर्वाधिक गूढ़ एवं आध्यात्मिक धर्म माना।

1882 में मद्रास के समीप अड्यार में थियोसोफिकल सोसाइटी का अंतर्राष्ट्रीय कार्यालय स्थापित किया गया। भारत में इस आंदोलन को सफल बनाने का श्रेय एक आयरिश महिला श्रीमती एनी बेसेंट को दिया गया, जो 1893 में भारत आयी और इस संस्था के उद्देश्यों के प्रचार-प्रसार में लग गयी।

एनी बेसेंट ने बनारस में 1898 में सेंट्रल हिंदू कॉलेज की स्थापना की जो, 1916 में पंडित मदन मोहन मालवीय के प्रयासो से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में परिणित हो गया।

प्रमुख धार्मिक संस्थाएँ और आंदोलन

  • शिवदयाल साहिब ने 1861 में आगरा में राधा स्वामी आंदोलन चलाया।
  • 1887 में शिव नारायण अग्निहोत्री ने लाहौर में देव समाज की स्थापना की।
  • भारतीय सेवक समाज की स्थापना 1905 में समाज सुधार के उद्देश्य से गोपाल कृष्ण गोखले ने की।
  • रहनुमाई मजदयासन सभा की स्थापना 1851 में फरदान जी, दादाभाई नौरोजी तथा एस.एस. बंगाली ने की। इस संस्था राफ्त गोफ्तार नाम की एक पत्रिका का प्रकाशन भी किया।
  • ज्योतिबा फुले ने सत्यशोधक समाज की स्थापना की तथा गुलामगीरी नाम की एक पुस्तक की रचना भी की।
  • श्री नारायण गुरु के नेतृत्व में केरल के वायकोम मंदिर में अछूतों के प्रवेश हेतु एक आंदोलन हुआ था।
  • सी. एन. मुदलियार ने दक्षिण भारत में 1915-16 में जस्टिस पार्टी की स्थापना की।
  • ई.वी. रामास्वामी नायकर ने दक्षिण भारत में 1920 मे आत्मसम्मान आंदोलन चलाया।
  • बी.आर.अम्बेडकर ने 1924 में अखिल भारतीय दलित वर्ग की स्थापना की तथा 1927 में बहिष्कृत भारत नामक एक पत्रिका का प्रकाशन किया।
  • भारत में महिलाओं के उन्नति के लिए 1917 में श्रीमती एनी बेसेंट ने मद्रास में भारतीय महिला संघ की स्थापना की।
  • महात्मा गांधी ने छुआछूत के विरोध के लिए 1932 में हरिजन सेवक संघ की स्थापना की।
  • अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ की स्थापना बी. आर. अंबेडकर ने 1942 में की।

मुस्लिम सुधार आंदोलन

अहमदिया आंदोलन

अहमदिया आंदोलन का आरंभ 1889-90 में मिर्जा गुलाम अहमद ने फरीदकोट में किया। गुलाम अहमद हिंदू सुधार आंदोलन, थियोसोफी और पश्चिमी उदारवादी दृष्टिकोण से प्रभावित तथा सभी धर्मों पर आधारित एक अंतर्राष्ट्रीय धर्म की स्थापना की कल्पना करते थे।

अहमदिया आंदोलन का उद्देश्य मुसलमानों में आधुनिक बौद्धिक विकास का प्रचार करना था। मिर्जा गुलाम अहमद ने हिंदू देवता कृष्ण और ईसा मसीह का अवतार होने का दावा किया।

अलीगढ आंदोलन

सर सैय्यद अहमद द्वारा चलाए गए आंदोलन को अलीगढ आंदोलन के नाम से जाना जाता है। सर सैय्यद अहमद मुसलमानों में आधुनिक शिक्षा का प्रसार करना चाहते थे।

इसके लिए उन्होंने 1865 में अलीगढ में मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना की, जो 1890 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बन गया। अलीगढ आंदोलन ने मुसलमानों में आधुनिक शिक्षा का प्रसार किया तथा कुरान की उदार व्याख्या की।

इस आंदोलन के माध्यम से सर सैय्यद अहमद ने मुस्लिम समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया।

देवबंद आन्दोलन

यह रुढ़िवादी मुस्लिम नेताओं द्वारा चलाया गया आंदोलन था, जिसका उद्देश्य विदेशी शासन का विरोध तथा मुसलमानों में कुरान की शिक्षाओं का प्रचार करना था। मोहम्मद कासिम ननौतवी तथा रशीद अहमद गंगोही ने 1867 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में इस आंदोलन की स्थापना की।

यह अलीगढ़ आंदोलन का विरोधी था। देवबंद आंदोलन के नेताओं में शिमली नुमानी, फारसी और अरबी के प्रसिद्ध विद्वान व लेखक थे शिबली नुमानी ने लखनऊ में नदवतल उलेमा तथा दार-उल-उलूम की स्थापना की। देवबंद के नेता भारत में अंग्रेजी शासन के विरोधी थे। यह आंदोलन पाश्चात्य और अंग्रेजी शिक्षा का भी विरोध करता था।

सिख सुधार आंदोलन

हिंदू और मुसलमानों की तरह सिक्खों में भी सुधार आंदोलन हुए। सिक्खों के प्रबुद्ध लोगों पर पश्चिम के विकासशील और तर्कसंगत विचारों का प्रभाव पड़ा। 19 वीं सदी में सिक्खों की संस्था सरीन सभा की स्थापना हुई।

पंजाब का कूका आंदोलन सामाजिक एवं धार्मिक सुधारो से संबंधित था। जवाहर मल और रामसिंह ने कूका आंदोलन का नेतृत्व किया।अमृतसर में सिंह सभा आंदोलन चलाया गया। अकाली आन्दोलन द्वारा 1921 में गुरुद्वारों के महंतों के विरुद्ध अहिंसात्मक अन्दिलन का सूत्रपात हुआ।

इस आंदोलन के परिणाम स्वरुप 1922 में सिख गुरुद्वारा अधिनियम पारित किया गया, जो आज तक कार्यरत है।

भारतीय समाज पर इन आंदोलनों के प्रभाव:

उन्नीसवीं शताब्दी में भारत में जो धार्मिक एवं सामाजिक सुधार आंदोलन चलाये गये, उनके प्रभाव से भारतीय समाज के शैक्षणिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले ।

  • आधुनिक शिक्षा, ज्ञान, विज्ञान, दर्शन एवं साहित्य के अध्ययन में लोगों की रूचि में वृद्धि हुई ।
  • देश में स्कूलों एवं कॉलेजों की संख्या में वृद्धि हुई ।
  • महिलाओं की स्थिति में भी कुछ सुधार हुआ । सती प्रथा, बाल विवाह तथा पर्दा प्रथा में कमी आई एवं उनकी शिक्षा का विकास हुआ ।
  • सभी सुधारकों द्वारा वेदों के पुन: अध्ययन, एवं संस्कृति के गौरव गान से, भारतीयों में स्वतंत्रता व राष्ट्रीयता की भावना को और मजबूती प्रदान की ।
  • इन सुधार आंदोलनों से पूरे देश में एक नई जाग्रति फैली तथा सांस्कृतिक चेतना का विकास हुआ ।

शिक्षा, साहित्य एवं कला तथा विज्ञान का विकास:

सभी समाज सुधारकों ने शिक्षा के विकास पर बल दिया तथा व्यक्तिगत प्रयास भी किए, जिससे इस सदी में स्कूलों व कॉलेजों की संख्या में वृद्धि हुई:

  • धनाभाव के कारण प्राथमिक शिक्षा को पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिल सका, जिससे बीसवीं सदी के प्रारंभ में भारत के अधिकांश गाँवों में प्राथमिक स्कूल नहीं थे, परिणामस्वरूप देश के अधिकांश बच्चे शिक्षा से वंचित रहे ।
  • शिक्षा केंद्रों एवं नीतियों पर ब्रिटिश प्रभाव को कम करने के लिए भारतीय सुधारकों ने ‘राष्ट्रीय शिक्षा परिषद’ की स्थापना की ।
  • वाराणसी एवं अहमदाबाद में विद्यापीठों की एवं अलीगढ़ में ‘जामिया मिलिया इस्लामिया’ की स्थापना की गई ।
  • पंडित मदन मोहन मालवीय ने बनारस में ‘हिन्दू विश्वविद्यालय’ तथा रविन्द्रनाथ ठाकुर ने शांति निकेतन में ‘विश्व-भारती’ की स्थापना की 

संस्कृति:

सभी सुधार आंदोलनों के माध्यम से सुधारकों ने भारतीय संस्कृति के महत्व की व्याख्या की तथा वेदों के ज्ञान को अनिवार्य बताया परिणामस्वरूप भारतीयों के हृदय में अपनी संस्कृति के प्रति नव-चेतना का विकास हुआ । इस सदी में वेद पुराण, भगवद्‌गीता एवं अनेक संस्कृत ग्रंथों का विभिल भाषाओं में अनुवाद किया गया जिससे आम जनता को भी शिक्षा संस्कृति एवं धर्म की जानकारी हो सके ।

साहित्य एवं कला:

उन्नीसवीं सदी के भारत में अनेक भाषाओं के साहित्य का विकास हुआ ।

  • जहाँ पहले अधिकांश साहित्य धार्मिक विषयों से प्रेरित थे, वहीं इस समय में पद्य के साथ ही गद्य को भी स्थान मिला ।
  • उपन्यास, लघुकथा, नाटक तथा निबंध जैसी नई शैलियों का भी विकास हुआ ।
  • साहित्य की इन शैलियों एवं काव्य में मुख्यत: मानवतावादी विषय ही होते थे, जिनका संबंध साधारण लोगों के जीवन संघर्ष एवं उनकी समस्याओं से ही संबंधित होता था ।
  • इस समय लिखी गई रचनाओं व साहित्य ने देश प्रेम एवं राष्ट्रीयता की भावना को सशक्त करने का काम भी किया ।
  • क्षेत्रीय भाषाओं में विकसित साहित्य ने सुधारवादी विचारों का प्रचार-प्रसार किया एवं अन्याय के विरूद्ध आवाज उठाई ।
  • तेलगु के गुरजादा अप्पा राव, मराठी के हरिनारायण आपटे, मलयालम के कुमारन आसन, उडिया के फकीर मोहन सेनापति, तमिल के सुब्रहमण्यम भारती, असमिया के नेमचंद्र बरूआ, कन्नड के के. वेंकटप्पा गौडा पुट्‌टप्पा एवं उर्दू के मुहम्मद इकबाल आदि का इस समय सांस्कृतिक एवं सामाजिक चेतना की जाग्रति में प्रमुख योगदान रहा ।

कला के क्षेत्र में भी इस शताब्दी में बहुत उन्नति हुई । रवीन्द्रनाथ ठाकुर एवं अन्य कलाकारों ने भारत की शास्त्रीय परंपरा की चित्रकला की जिस शैली का विकास किया वह बंगाल शैली के नाम से जानी गई ।

  • भारतीय महाकाव्यों तथा आख्यानों के आधार पर राजा रवि वर्मा ने अनेक चित्र बनाये तथा नंदलाल बसु ने प्राचीन कथाओं के दृश्यों के साथ-साथ कारीगरों और शिल्पियों के दैनिक जीवन से संबंधित चित्रों को भी बनाया ।

विज्ञान का विकास:

अनेक सुधारकों ने विज्ञान के विकास से ही देश की प्रगति को बताया, इसलिए उन्होंने विज्ञान के अध्ययन पर जोर दिया एवं अनेक वैज्ञानिक संस्थाएं स्थापित कीं ।

  • चिकित्सा विज्ञान के पहले भारतीय विद्यार्थी, महेन्द्रनाथ सरकार थे, जिन्होंने सन् 1876 ई॰ में ‘इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साइंस’ नामक संस्था की स्थापना की जो विज्ञान का प्रचार-प्रसार करने वाली पहली प्रमुख संस्था थी ।
  • बीसवीं सदी के तीसरे दशक में ‘इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन’ की स्थापना हुई जिसके माध्यम से देश के विभिन्न वैज्ञानिक एक-दूसरे के संपर्क में आये ।
  • भौतिकी के क्षेत्र में चंद्रशेखर वेंकटरमन, सांख्यिकी के क्षेत्र में प्रफुल्लचंद महलनोविस तथा गणित के क्षेत्र में श्रीनिवास रामानुजम का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है ।
  • अंग्रेजी शासनकाल के प्रमुख भारतीय वैज्ञानिकों में मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया (1861- 1962) ने इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया । बाँध निर्माण, जल विद्युत का विकास, रेशम उद्योग आदि के विकास में इनका सक्रिय योगदान था ।
  • प्रफुल्लचंद्र राय, जगदीशचंद्र बसु, सत्येन्द्रनाथ बसु, मेघनाथ शाह, डी॰एन॰ वाडिया एवं बीरबल साहनी आदि वैज्ञानिकों का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा ।

प्रेस का विकास:

किसी भी सुधार आंदोलनों के विचार को जन सामान्य तक पहुंचाने का सही कार्य प्रेस के माध्यम से ही किया जाता है । प्रारंभ में प्रेस समाचार-पत्र एवं पत्र-पत्रिकाओं पर केवल अंग्रेजों का ही वर्चस्व था किंतु उन्नीसवीं सदी में सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों तथा राष्ट्रभावना को प्रबल करने के विचार से सुधारकों ने अनेक निजी समाचार पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन किया ।

जिन समाचार-पत्रों के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना का विकास करने का प्रयास किया जा रहा था उनके संपादकों को अंग्रेज जेल में डाल देते थे किंतु फिर भी इस समय के अनेक समाचार-पत्रों ने भारतीयों की माँगों शिकायतों व उनकी दुर्दशा का खुलकर चित्रण किया तथा स्वतंत्रता की भावना को और अधिक सशक्त किया ।

प्रमुख समाचार पत्र व पत्रिकाएं थे:

  • ‘द-हिन्दू’
  • ‘द इंडियन मिरर’
  • ‘अमृत बाजार पत्रिका’
  • ‘केसरी’
  • ‘मराठा’
  • ‘स्वदेशमित्र’
  • प्रभाकर’
  • ‘इंदु प्रकाश’ आदि ।

उन्नीसवीं शताब्दी में हुए धार्मिक व सामाजिक सुधार आंदोलनों के सकारात्मक परिणामों ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलनों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया ।

Religious Reform Movement Important Facts- 

  • कन्यावध की प्रथा राजपूतों और बंगालियों में प्रचलित थी 18०2 ईसवी में नियम 4 द्वारा इस पर रोक लगाई गई।
  • लार्ड विलियम बैंटिक मैं 1829 ईस्वी में नियम 17 के तहत सती प्रथा पर बंगाल में प्रतिबंध लगाया। बाद में यह प्रतिबंध 1830 ईसवी में बंबई और मद्रास में भी लागू हो गया।
  • जोनाथन डंकन ने 1791 ईस्वी में बनारस में एक संस्कृत कॉलेज की स्थापना की तथा विलियम केरी ने सेरामपुर कॉलेज की स्थापना की।
  • 1844 ईसवी में मंचाराम ने मानव धर्म सभा का गठन किया जिसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक समस्याओं पर परिचर्चा करना था।
  • 1856 ईसवी में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम-15 (लॉर्ड डलहौजी के समय) द्वारा विधवा विवाह को वैध माना गया। ईश्वर चंद्र ने अपना सारा जीवन विधवा विवाह में स्त्री शिक्षा को समर्पित कर दिया।
  •  ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने स्त्री शिक्षा के प्रचार के लिए बंगाल में 35 विद्यालयों की स्थापना की।
  • स्त्री शिक्षा के लिए ईसाई मिशनरियों ने 1819 ईसवी में कोलकाता में तरुण स्त्री सभा की स्थापना की।
  • जे.ई.बेथून ने 1850 ईसवी में कलकता में एक बालिका विद्यालय की स्थापना की ईश्वर चंद्र विद्यासागर बेतूल स्कूल के सचिव रहे थे।
  • वुड डिस्पैच (1854 ईसवी) में पहली बार स्त्री शिक्षा पर बल दिया गया।
  • 1866 ईसवी में मुंबई में विधवा पुनर्विवाह संघ की स्थापना हुई और 1896 ईस्वी में डी.के. कर्वे ने पुणे में विधवा आश्रम की स्थापना की।
  • 1916 ईस्वी में कर्वे ने पुना में पहला महिला विश्वविद्यालय स्थापित किया। डॉक्टर आर.जी. भंडारकर इसके प्रथम कुलपति थे। वर्तमान में यह विश्वविद्यालय बंबई में है।
  • 1833 ईसवी के चार्टर अधिनियम द्वारा ब्रिटिश साम्राज्य में दास प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया गया। लेकिन भारत में दास प्रथा पर प्रतिबंध 1843 ई. में लॉर्ड एलनबरो के समय लगा।
  • 1872 ईस्वी के अंतर्जातीय व विधवा पुनर्विवाह अधिनियम ( नेटिव मैरिज एक्ट ) को ब्रह्म मैरिज एक्ट भी कहते हैं।
    यह क़ानून केवल ब्रह्म समाज के अनुयायियों पर ही लागू होता है।
  • नेटिव मैरिज एक्ट को मान्यता दी व बाल विवाह को वर्जित किया गया।
  • 1891 में बी.एम. मालाबारी व एस.एस. बंगाली के प्रयासों से ‘एज ऑफ कंसेंट एक्ट’ (सहमति आयु अधिनियम) पारित किया गया।
  •  तिलक ने एज ऑफ कंसेंट एक्ट को भारतीय सामाजिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप माना और इसका विरोध किया। तिलक ने कहा कि समाज द्वारा समाज सुधार स्वयं लागू करने चाहिए न की सरकारी हस्तक्षेप से।
  • 1930ई. में हरविलास शारदा के प्रयत्नों से शारदा एक्ट पारित कर एज ऑफ कंसेंट एक्ट को संशोधित कर विवाह की आयु लड़की के लिए 14 वर्ष तथा लड़के के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई।
  • दक्षिण तमिलनाडु के नाडारों ने 1910 ईस्वी में नाडार महाजन संगम की स्थापना की।
  • प्रार्थना समाज की सदस्या पंडिता रमाबाई ने आर्य महिला सभा की स्थापना की।
  • रमाबाई रानाडे ने विधवा महिलाओं की शिक्षा के लिए 1889 ईसवी में शारदा सदन की स्थापना की।
  • पुना सेवा सदन की स्थापना 19०9 ईस्वी में रमाबाई रानाडे और जी.के. देवधर ने की। इसका उद्देश्य महिलाओं एवं बच्चों का कल्याण तथा विधवाओं को आत्मनिर्भर बनाना था।
  • जुलाई, 1980 में बी.एम. मालाबारी और दयाराम गिडुमल ने महिला उद्धार के लिए सेवा सदन सोसायटी की स्थापना की।
  • 17 फरवरी, 1916 ईस्वी को दिल्ली में लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुई।
  • 1922 ईस्वी में अमृतलाल विट्ठलदास ने भीलों की स्थिति सुधारने के लिए भील सेवा मंडल की स्थापना की।
  • बंबई में ‘एलफिस्टन कॉलेज’ की स्थापना 1834 ईस्वी में हुई।
  • अमृतसर का खालसा कॉलेज 1892 ईस्वी में स्थापित हुआ।
  • महादेव गोविंद रानाडे ने 1887 ईसवी में ‘भारतीय राष्ट्रीय सामाजिक सम्मेलन’ का गठन किया।
  • रानाडे की मृत्यु के बाद 1901 में एन.जी. चंद्रावरकर का संचालन किया।

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No of Questions-21

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प्रश्न 1 1907 में बनी अधिनियम का नाम क्या था

Correct! Wrong!

प्रश्न2 1908 में बनी अधिनियम का नाम क्या था

Correct! Wrong!

प्रश्न 3 1910 में बनी अधिनियम का नाम क्या था

Correct! Wrong!

4."प्रार्थना समाज" की स्थापना किसने की

Correct! Wrong!

5.स्वामी दयानंद सरस्वती के संबंध में कौन-सा कथन असत्य है?

Correct! Wrong!

6.19वीं तथा 20वीं शताब्दी के धार्मिक आंदोलनों के संबंध में नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजियेः (1)ये धार्मिक सुधार आंदोलन बुद्धिवाद तथा मानवतावाद के सिद्धांतों पर आधारित थे। (2) इन आंदोलनों ने उभरते हुए मध्यवर्ग तथा आधुनिक शिक्षा प्राप्त लोगों को सबसे अधिक प्रभावित किया।उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सत्य है/हैं?

Correct! Wrong!

7.धार्मिक सामाजिक सुधार आंदोलन के नकारात्मक पक्षों के संबंध में नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजियेः (1). इन आंदोलनों की पहुँच किसानोंतथा नगरों की गरीब जनता तक नहीं थी। (2). इसने मानव बुद्धि तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण की श्रेष्ठता के विचार को धक्का पहुँचाया। (3).धर्म में ज़रूरत से ज़्यादा ज़ोर देने पर समाज में फूट की प्रवृत्ति बढ़ी।उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं

Correct! Wrong!

8.आधुनिक भारत मे हिंदू धर्म के सुधार का पहला आंदौलन कौनसा था

Correct! Wrong!

9. भारतीय पुनर्जागरण का प्रथम नेता किसे कहा जाता है?

Correct! Wrong!

10. राजा राममोहन राय के संबंध में नीचे दिये गए कथनों में से कौन-सा/से सत्य है/हैं? 1. उन्होंने मूर्तिपूजा और निरर्थक धार्मिक कृत्यों के प्रचलन का विरोध किया। 2. उन्होंने सती प्रथा के विरुद्ध सामाजिक आंदोलन चलाया। 3. उन्होंने एकेश्वरवाद का समर्थन किया। कूटः

Correct! Wrong!

11. 1817 में कलकत्ता में प्रसिद्ध हिंदू कॉलेज की स्थापना किसने की?

Correct! Wrong!

12. ‘यंग बंगाल आंदोलन’ का आरंभ किसने किया?

Correct! Wrong!

13. आधुनिक भारत के निर्माण में ईश्वरचंद्र विद्यासागर के योगदान के संबंध में कौन-से कथन सत्य हैं? 1. उन्होंने अपनी रचनाओं द्वारा बंगला में आधुनिक गद्य शैली के विकास में योगदान दिया। 2. संस्कृत कॉलेज के दरवाजे गैर-ब्राह्मण विद्यार्थियों के लिये खोल दिये। 3. विधवा पुनर्विवाह के लिये लंबा संघर्ष किया। 4. नारी शिक्षा को प्रोत्साहन दिया। कूटः

Correct! Wrong!

14. महाराष्ट्र के किस समाज सुधारक को ‘लोकहितवादी’ उपनाम से जाना जाता है?

Correct! Wrong!

15. 19वीं सदी में पश्चिमी-भारत में सुधार आंदोलन के संबंध में नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजिये: 1. महाराष्ट्र में स्थापित ‘परमहंस मंडली’ ने जात-पात के बंधनों को तोड़ने का कार्य किया। 2. दादाभाई नौरोजी, पारसी धर्म सुधार संगठन के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। 3. विष्णु शास्त्री पंडित ने ‘विधवा-विवाह समाज’ की स्थापना की। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सत्य है/हैं?

Correct! Wrong!

16. ज्योतिबा फुले के संबंध में नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजिये। 1. वे केरल के समाज सुधार आंदोलन के पहले पंक्ति के नेता थे। 2. उन्होंने ऊँची जातियों के प्रभुत्व और ब्राह्मणों की श्रेष्ठता के विरुद्ध जीवन भर अभियान चलाया। 3. उन्होंने बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिये स्कूल शुरू किये। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सत्य है/हैं?

Correct! Wrong!

17. ब्रह्म समाज के संबंध में नीचे दिये गए कथनों पर विचार कीजियेः 1. राजा राममोहन राय के बाद ब्रह्म समाज की परंपरा को देवेन्द्रनाथ ठाकुर ने आगे बढ़ाया। 2. ब्रह्म समाज का अधिकांश प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों एवं मज़दूरों पर था। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

Correct! Wrong!

18. 1896 में विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, जिसका प्रमुख उद्देश्य था-

Correct! Wrong!

19. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः 1. भारत में थियोसोफिकल सोसायटी का मुख्यालय अदियार में था। 2. थियोसोफिस्टों ने हिंदुत्व, जरथुस्त्र मत तथा बौद्ध मत जैसे प्राचीन धर्मों को पुनर्स्थापित तथा मज़बूत करने का प्रयास किया।  उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

Correct! Wrong!

20. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः 1. मुहम्मडन लिटरेरी सोसायटी ने मुसलमानों में धार्मिक, राजनीतिक तथा सामाजिक प्रश्नों पर विचार विमर्श को बढ़ावा दिया। 2. सैयद अहमद खान द्वारा मुहम्मडन एंग्लो-ओरियंटल कॉलेज की स्थापना इस्लामिक धर्म तथा शिक्षा का प्रचार-प्रसार करने के लिये किया गया। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

Correct! Wrong!

21. भारत में सर्वप्रथम किसने निचली जातियों की लड़कियों के लिये स्कूल खोले?

Correct! Wrong!

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

यशोदा अजमेर, प्रभुदयाल मूण्ड चूरु, चित्रकूट त्रिपाठी, P K Nagauri

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