( पुनर्जागरण और यूरोप में सुधार )

पुनर्जागरण का प्रारंभ इटली के फ्लोरेंस नगर से माना जाता है  इटली के महान कवि दांते को पुनर्जागरण का अग्रदूत माना जाता है। दाते के बाद पुनर्जागरण की भावना का श्रय देने वाला दूसरा व्यक्ति पैट्रॉक था। पेट्राक को मानवतावाद का जनक माना जाता है।

आधुनिक विश्व का प्रथम राजनीतिक चिंतक फ्लोरेंस निवासी मैक्यावली को माना जाता है। आधुनिक राजनीतिक दर्शन का जनक मैक्यावली को माना जाता है।

जर्मनी निवासी मार्टिन लूथर को धार्मिक सुधार आंदोलन की शुरुआत का प्रवर्तक माना जाता है।  इन्होने बाइबिल का जर्मन भाषा में अनुवाद किया था। धर्म सुधार आंदोलन की शुरुआत इंग्लैंड में हुई।

जियाटो – पुनर्जागरण काल मे चित्रकला का जनक।

यूरोप में राष्ट्रवाद केउदय के निम्नांकित कारण थे:-

सामन्तवादी व्यवस्था- सामन्तवादी व्यवस्था के चलते समस्त अधिकार सामन्तों अथवा उच्च वर्ग के हाथों में थे तथा आम जनता की स्थिति अत्यन्त शोचनीय थी।

राष्ट्रीयता की भावना का विकास- पुनर्जागरण के परिणामस्वरूप प्रत्येक देश में राष्ट्रवादी विचारधाराओं का विकास हुआ था, जिससे राष्ट्रवादी आन्दोलनों का जन्म हुआ ।

पुर्जागरण- पुनर्जागरण के परिणामस्वरूप जनता में बौद्धिकता एवं तर्कवादिता का विकास हुआ था और वे बिना तर्क के किसी बात को स्वीकार नहीं करना चाहते थे ।

मध्यम वर्ग का उदय- मध्यम वर्ग का उदय होने से उसने परम्परागत शासन-पद्धति व जनता के शोषण के विरुद्ध आवाज उठाई ।

श्रमिक वर्ग का उदय- औधोगिक क्रांति के फलस्वरूप श्रमिक वर्ग का उदय हुआ जिनकी स्थिति अत्यन्त दयनीय थी । अत: उनमें धीरे-धीरे आक्रोश बढ़ता गया ।

भारत में राष्ट्रवाद के विकास के पीछे अंग्रेजी साम्राज्यवाद के विरुद्ध असन्तोष, आर्थिक नीतियों से प्रभावित जनसामान्य,अंग्रेजी शिक्षा का प्रसार और प्रजातीय विभेद की नीति थी। देश में मध्यम वर्ग का उदय हुआ, साथ में साहित्य एवं समाचार-पत्रों ने राष्ट्रवाद को विकसित किया तो सामाजिक-धार्मिक सुधार आन्दोलनों ने राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया।

 

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प्रभुदयाल मूण्ड चूरु, कमलनयन पारीक अजमेर, डॉ भंवर सिंह भाटी, Pushplata, ajmer, Rafik khan, दिव्या बूंदी

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