1. प्रतिनिधित्व का आमूल परिवर्तनवादी सिद्धांत:-

  1. इसके प्रतिपादक रूसो व नव-वामपंथी है।
  2. इसमे लोकमत को सबसे अधिक महत्व दिया गया है।
  3. यह सिद्धान्त प्रतिनिधित्व शासन को अस्वीकार करते हुए कहता है की सुद्ध या प्रत्यक्ष लोकतंत्र ही सच्चा लोकतंत्र है।यह मानता है की लोग स्वयं महत्वपूर्ण विषयो पर विचार करने और निर्णय लेने में सक्षम होते है।

2 प्रतिनिधित्व का उदारवादी सिद्धान्त

  1. इसके मुख्य प्रवर्तक लोक और जेफरसन है
  2. यह सिद्धान्त सबसे अधिक लोकतांत्रिक है।
  3. इस सिद्धान्त के अनुसार सभी लोग समान है, इसलिए वे सब शासन करने में समान रूप से समर्थ है।
  4. अतः प्रत्येक प्रतिनिधि को अपने निर्वाचकों के सन्देशवाहक का कार्य करना चाहिए

3 संभ्रांतवादि सिद्धान्त :-

  1. इसके समर्थक पैरेटो, मोस्का और मिस्चेल है।
  2. इसकी मान्यता यह है की चुने हुए उत्तम लोगो के हाथ में शासन रहना लोगो के हित में है।
  3. योग्यता के तत्व का इसमे महत्व है।

नोट:-प्रतिनिधित्व के मोडल

  1. ट्रस्टिशिप मॉडल
  2. प्रदत्त मॉडल
  3. जनादेश मॉडल
  4. प्रतिरूप मॉडल

 

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No of Questions-36

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नेमीचंद चाँवला जी टोंक, दीपक जी मीना सीकर, नवीन कुमार जी, रवि जी जोधपुर, हरेन्द्रसिंह जी, मुकेश पारीक ओसियाँ

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