रूस की क्रांति का महत्व न केवल यूरोप के इतिहास में वरन् विश्व के इतिहास में है। जिस प्रकार 18वीं शताब्दी के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटना फ्रांस की राज्य क्रांति है उसी प्रकार बीसवीं शताब्दी की सबसे महत्वपूर्ण घटना रूस की 1917 ई. की बोल्शेविक क्रांति थी

इस समय रूस का समस्त समाज तीन विभिन्न श्रेणियों में विभक्त था, जिनमें आपस में किसी भी प्रकार की सद्भावना विद्यमान नहीं थी। वे एक दूसरे को अपने से पूर्णतया भिन्न और पृथक समझती थीं।

  • प्रथम श्रेणी में कुलीन वर्ग आता था। इसको राज्य की ओर से बहुत अधिकार प्राप्त थे।
  • द्वितीय श्रेणी के अंतर्गत उच्च मध्यम वर्ग आता था, जिसमें व्यापारी छोटे जमींदार, पूंजीपति सम्मिलित थे।
  • तृतीय श्रेणी के अंतर्गत कृषक, अर्द्धदास कृषक तथा श्रमिक सम्मिलित थे।

इसके साथ राज्य तथा अन्य वर्गों का व्यवहार बहुत ही अमानुषिक था।जार निकोलस पूर्ण निरंकुश तथा स्वेच्छाचारी शासक था। यह जनता को किसी प्रकार का अधिकार प्रदान करनेके पक्ष में नहीं था।

बल्शेविक क्रांति ( Bolshevik Revolution )

रूस में 1917 में हुई क्रांति को ही बोल्शेविक क्रांति कहा जाता है, क्योंकि बोल्शेविक नामक राजनीतिक समूह ने इस क्र ति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और क्रांति की दशा एवं दिशा निर्धारित की थी।

रूसी क्रांति का तात्कालिक कारण प्रथम विश्व युद्ध में रूस की पराजय थी। 7 नवंबर 1917 के बोल्शेविक क्रांति का नेतृत्व लेनिन ने किया था। क्रांति के समय रूस का जार निकोलस द्वितीय था। क्रांति का प्रारंभ 7 मार्च 1917 से हो गया था 

6 नवंबर 1917 को लेनिन ने सत्ता ग्रहण की। क्योंकि रूसी कैलेंडर विश्व कैलेंडर से 8 दिन पीछे था अतः इस क्रांति को अक्टूबर क्रांति भी कहा जाता है। ट्राटसिक ने लाल सेना का संगठन किया था। रूसी क्रांति पर जर्मनी निवासी कार्ल मार्क्स के विचारों का प्रभाव था।

कार्ल माक्स ने दास केपिटल व कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो की रचना की। रूसी साम्यवाद का जनक प्लोखानोवा को माना जाता है।  16 अप्रैल 1917 को लेनिन ने अप्रैल थीसिस नामक क्रांतिकारी योजना प्रकाशित की।

चेका का संगठन लेनिन ने किया था। साम्यवादी शासन का पहला प्रयोग रूस में हुआ। काम के अधिकार को संवैधानिक अधिकार के रूप में मान्यता मिली। आधुनिक रूस का निर्माता स्टालिन को माना जाता है।

बोल्शेविक क्रांति के कारण ( Reasons for the Bolshevik Revolution )

  • रूस के ज़ार निकोलस द्वितीय का स्वेच्छाचारी शासन इस क्रांति के उत्तरदायी कारणों में सबसे महत्त्वपूर्ण था।
  • रूस और जापान के बीच 1904-05 में हुए युद्ध में छोटे समझे जाने वाले जापान से रूस की पराजय से सरकार की अकर्मण्यता जनता के समक्ष उजागर हुई।
  • 1905 में प्रार्थना पत्र देने जा रही भीड़ पर अंधाधुंध गोली चलाना।
  • कुस्तुंतुनिया और दादनिल्स पर कब्ज़ा करने हेतु ज़ार की साम्राज्यवादी आकांक्षा के कारण रूस का प्रथम विश्वयुद्ध में शामिल होना।
  • इसके अतिरिक्त राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार ने जनता को अतिशय कष्ट पहुँचाया, भोजन की कमी, सैनिकों के प्रति सरकार की बेरुखी आदि ऐसे मुद्दे थे जिसने रूस को क्रांति पर ला खड़ा किया।

परिणाम ( Bolshevik Revolution Result  )

  • रूसी क्रांति के परिणामस्वरूप सर्वप्रथम निरंकुश-तंत्र, अभिजात वर्ग और चर्च की शक्ति का अंत हो गया।
  • ज़ार के राज्य का अंत कर उसे सोवियत समाजवादी गणराज्य संघ में बदल दिया गया।
  • राज्य की आर्थिक नीतियों को समाजवादी आदर्शों के माध्यम से चलाने का प्रयास किया गया।
  • काम करने के अधिकार को संवैधानिक अधिकार बनाया गया और सबको कार्य उपलब्ध कराना सरकार का कर्त्तव्य हो गया।
  • प्रथम विश्वयुद्ध समाप्त हो गया, क्योंकि न केवल बोल्शेविक बल्कि संपूर्ण यूरोप के समाजवादी संगठन युद्ध के विरुद्ध थे।

महत्त्व ( Importance )

इस क्रांति ने रूस को विश्व शक्ति के रूप में उभारा। रूस में सर्वहारा वर्ग का उदय हुआ, जिसने पूंजीवाद का विरोध किया। इसके परिणामस्वरूप विश्व के विभिन्न देशों में वर्ग विहीन समाज की स्थापना को प्रोत्साहन मिला।

 

Play Quiz 

No of Questions-15

[wp_quiz id=”3235″]

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

कमलनयन पारीक अजमेर,  प्रभुदयाल मूण्ड चूरु, Rafik khan, जुल्फिकार जी अहमद दौसा, लोकेश स्वामी

Leave a Reply

Your email address will not be published.