राजस्थान की अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका ( Role of agriculture in Rajasthan’s economy )

कृषि विकास ( Agricultural development )

राजस्थान की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण स्थान है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की कुल जनसंख्या में ग्रामीण जनसंख्या का भाग 75•07 प्रतिशत है। यह ग्रामीण जनसंख्या जीवन यापन के लिए कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र पर निर्भर है।
राजस्थान का भूमि उपयोग उद्देश्य के लिए रिपोर्टिंग क्षेत्रफल 2008 में 34270 हजार हैक्टेयर था। इसमें सकल कृषिगत क्षेत्र 22208 हजार हैक्टेयर था। जो रिपोर्टिंग क्षेत्रफल का 64•80 प्रतिशत था।राज्य में 2007-08 में विभिन्न स्त्रोतों से सकल सिंचित क्षेत्र 8088 हजार हैक्टेयर था। जो सकल कृषिगत क्षेत्र का 36•42 प्रतिशत था।

सकल राज्य घरेलू उत्पाद में कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र का योगदान

1⃣ किसी अर्थव्यवस्था में एक वर्ष की अवधि में समस्त वस्तुओं एवं सेवाओं के मौद्रिक मूल्य को सकल राज्य घरेलू उत्पाद कहा जाताहैं।*
2⃣ राज्य घरेलू उत्पाद में कृषि, उद्योग,सेवाएँ के उत्पादन को सम्मिलित किया जाता है।
3⃣ वित्त वर्ष 2008-09 में स्थिर (2004-05) कीमतों पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान 21•42 प्रतिशत,उद्योग का योगदान 31•40 प्रतिशत तथा सेवाओं का योगदान 47•19 प्रतिशत था।
4⃣ पिछले कुछ वर्षों में (2008-09 से 2011-12) सकल घरेलू उत्पाद में कृषि के योगदान को देखें तो पाते है,कि स्थिर कीमतों (2004-05)पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान लगभग 22 प्रतिशत स्थिर सा हो गया है।

कृषि वृद्धि दर ( Agricultural growth rate )

कृषि एवं सम्बद्ध सेवाओं की वृद्धि दर में उच्चावचन खक प्रवृत्ति व्याप्त है,इसके पीछे कारण कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र का मानसून निर्भर होना है। कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र वृद्धि दर 2005-06 में -0•88 प्रतिशत थी।कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र वृद्धि दर 2008-09 में बढ़कर 6•12 प्रतिशत हो गई।

राजस्थान में औधोगिक विकास (Industrial development in Rajasthan)

राजस्थान अनेक आधुनिक औद्योगिक घरानों की जन्म भूमि है यहां की धरा ने स्टील किंग लक्ष्मी निवास मित्तल, बिड़ला,डालमिया, सिंघानिया, बाॅगड़,पोद्दार,आदि उद्योगपतियों को जन्म दिया इन्होंने देश और विदेश में औद्योगिक व्यापारी जगत में ख्याति अर्जित की है।स्वतंत्रता प्राप्ति के समय राजस्थान एक पिछड़ा हुआ प्रांत था राज्य में बिजली,पानी व यातायात के साधनों के अभाव के कारण बड़े पैमाने के आधुनिक उद्योगों का विकास संभव नहीं था इसके अलावा राजस्थान के औधोगिक विकास के क्षेत्र में केंद्र सरकार की कुल निवेश का लगभग 2% भाग में पाया जाता है।

आज राजस्थान योजनाबद्ध विकास के 62 वर्ष पूरे कर चुका है राजस्थान सरकार ने पंचवर्षीय योजनाओं में औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचागत संरचना और आधारभूत सामाजिक संरचना के विकास पर काफी बल दिया हैं। विगत वर्षों में केंद्र सरकार ने यहां के कई जिलों को औद्योगिक विकास की दृष्टि से पिछड़ा घोषित किया था। केंद्रीय सब्सिडी की व्यवस्था के अनुसार पिछड़े जिलों को सब्सिडी का लाभ मिलेगा। राज्य सरकार यहां से पलायन कर गए उद्योगपतियों तथा देश-विदेश के अन्य उद्यमियों को राज्य में विनियोग बढ़ाने हेतु आकर्षित करने के लिए परिवर्तनशील है।

राजस्थान सरकार द्वारा राज्य की स्वर्ण जयंती के अवसर पर 23 व 24 सितंबर 2000 को जयपुर में अंतरराष्ट्रीय राजस्थानी सम्मेलन 2000 का आयोजन किया गया अब राजस्थान में आधारभूत संरचना की स्थिति संतोषजनक होने के कारण बड़े उद्यमियों की मनोवृति बदल रही है। उद्यमियों के कदम राज्य में निवेश के लिए बढ़ने लगे है।राजस्थान में औद्योगिक विकास हेतु प्राकृतिक एवं मानवीय संसाधन बहुतायत में उपलब्ध है। यहां विभिन्न उद्योगों के विकास की संभावनाएं है।राजस्थान में खनिज आधारित उद्योगों का विकास किया जाए तो यह देश के औधोगिक दृष्टि से संपन्न राज्यों की श्रेणी में आ सकता है।

राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में उद्योग का भाग

➡राजस्थान के सकल राज्य घरेलू उत्पाद में उद्योग का भाग 2000-01 में 27•8 % था। जो 2005-06 में बढ़कर 29•7 % हो गया।वित्त वर्ष 2011-12 के सकल राज्य घरेलू उत्पाद में उद्योग का भाग स्थिर(2004-05) कीमतों पर 29•85 % प्रतिशत रहा है ।

उद्योग वृद्धि दर

➡ राजस्थान में खनन व विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 2005-06 में 12•09 % उल्लेखनीय रही। वित्त वर्ष 2008-09 में खनन व विनिर्माण क्षेत्र वृद्धि दर घटकर 3•21% रह गई। वैश्विक मंदी 2008 का असर राजस्थान की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा।

वैश्विक मंदी का राजस्थान पर प्रभाव 

➡वैश्विक मंदी 2008 से विश्व अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ा। इससे अनेक विकसित देशों की विकास दर घटी। भारत की अर्थव्यवस्था पर हालांकि की वैश्विक मंदी का असर बहुत ज्यादा नहीं पड़ा, किंतु भारत की विकास दर 2008-09 में घटकर 6•7% रह गई,जबकि यह 2007-08 में 9•3% प्रतिशत थी।भारत की औद्योगिक विकास दर 2008-09 में 2•5% तक गिर गई।

➡ स्थिर कीमतों(1999-2000) पर राजस्थान की सकल राज्य घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 2005-06 में 6•70 प्रतिशत थी। जो घटकर 2008-09 में 5•48 प्रतिशत रह गई,वित्त वर्ष 2008-09 में खनन एवं विनिर्माण वृद्धि दर 3•21 प्रतिशत गिर गई। इससे स्पष्ट होता है कि राजस्थान अर्थव्यवस्था पर वैश्विक मंदी का प्रभाव पड़ा है।

पंजीकृत फैक्ट्रियां (Registered factories)

राजस्थान में पंजीकृत फैक्ट्रियों की संख्या 1987 में 9665 थी जो 2007 में बढ़कर 10001 हो गई।

लघु उद्योगों का विकास(Development of small scale industries) 

➡ अर्थव्यवस्था में लघु उद्योगों का महत्वपूर्ण स्थान है। राज्य सरकार ने लघु उद्योगों के विकास पर विशेष बल दिया है लघु उद्योग में काफी व्यक्ति को रोजगार मिला हुआ है। राज्य में लघु उद्योगों की पंजीकृत इकाइयां 1975-76 में 20102 थी जो 2008-09 में बढ़कर 3•20 लाख हो गई। लघु उद्योगों में 1975-76 में 1•37 लाख रोजगार प्राप्त मिला हुआ था। लघु उद्योगों में रोजगार प्राप्त व्यक्तियों की संख्या 2008 में बढ़कर 13•16 लाख हो गईं।

खादी एवं ग्रामोद्योग खादी(Khadi and Village Industries Khadi) 

➡ खादी एवं ग्रामोद्योग कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन की दृष्टि से महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य में खादी एवं ग्रामोद्योग का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों को उत्तम गुणवत्ता की वस्तुओं के उत्पादन में सहायता प्रदान करना है कारीगरों को प्रशिक्षण दिलाना, सहकारिता की भावना जागृत करना,कच्चा माल तथा आवश्यक औजारों की पूर्ति द्वारा उत्पादन में वृद्धि करना है। राज्य में खादी एवं ग्राम उद्योग को बढ़ावा देने के लिए ?”फैशन फोर डवलपमेन्ट योजना”? संचालित की जा रही है राज्य में गुणवत्तापूर्ण एवं आकर्षक अधिग्रहण वस्त्रों के उत्पादन में वृद्धि हुई। वर्ष 2008-09 में खादी का 18•14 करोड का उत्पादन एवं ग्रामोद्योग में 301•79 करोड़ का उत्पादन हुआ।

औद्योगिक उत्पादन(Industrial Production)

➡ वर्तमान में राजस्थान में सूती एवं सिंथेटिक रेशे की इकाइयाँ,ऊनी, चीनी,सीमेंट टेलीविजन टायर ट्यूब फैक्ट्री वनस्पति तेल की मीलें की औद्योगिक इकाइयां है।

उद्योग ( Industry )

उद्योग के अंतर्गतवस्तुओं व सेवाओं के उत्पादन व निर्माणतथा इससे संबंधित केन्द्रिकृत क्षेत्रों को सम्मिलित किया जाता है।  देश के समग्र विकास को प्रोत्साहित करने के लिए औद्योगिकीकरण को सबसे महत्वपूर्ण तरीकों में से एक माना जाता है।

उद्योगों के विकास से पर्याप्त रोजगार, आय सृजन एवं जीवन स्तर में सुधार की अपार सम्भावनाएं हैं। इसलिए राज्य की अर्थव्यवस्था को नियोजित विकास द्वारा बढ़ावा देने के लिए पंचवर्षीय योजनाओं के आरंभ से ही राज्य सरकार एवं निजी क्षेत्र दोनों ही, विभिन्न प्रकार के उद्योगों के त्वरित विकास के लिए प्रयत्नशीलहै।

भारत में ’मेक इन इण्डिया’ की तर्ज पर राजस्थान में ’मेक इन राजस्थान’औद्योगिक अभिवृद्धि का एक अभिनव प्रयास है।

? राज्य की पहली उद्योग नीति-1978
? राज्य की नवीन औद्योगिक एवं निवेश नीति-2010

राजस्थान को औद्योगिक रूप से पिछड़ेपन की स्थिति विरासत के रूप में प्राप्त हुई है। राज्य के गठन के समय यहां मात्र 11 वृहद उद्योग ( 7 सूती वस्त्र, 2 सीमेंट व चीनी उद्योग) तथा 207 पंजीकृत फैक्ट्रियां विद्यमान थीं।

दूसरी पंचवर्षीय योजना में तीव्र औद्योगिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। भौगोलिक पक्षराजस्थान का लगभग 61% भाग मरु आच्छादित है और ऐसी प्रतिकूल भौगोलिक परिस्थितियों.के कारण प्रारंभ से ही यह औद्योगिक रूप से पिछड़ा राज्य रहा है।

उद्योग विभाग राज्य में औद्योगिक विकास, हस्तकला के विकास एवं औद्योगिक गतिविधियों के संचालन में आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करने, उद्योगों को सहायता तथा सुविधाएं उपलब्ध कराने का दायित्व उद्योग आयुक्तालय का है।

वर्तमान में उद्यमियों को इनपुट तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु उद्योग विभाग के अधीन 36 जिला उद्योग केन्द्र एवं 7 उपकेन्द्र कार्यरत हैं।  जिला उद्योग केन्द्रों की स्थापना वर्ष 1978 से केंद्र प्रवर्तित योजना के अंतर्गत आरंभ हुई।

औद्योगिक संस्थाएं ( Industrial institutions )

1 रीको( RIICO)- Rajasthan State Industrial development and Investment Corporation)

 स्थापना – 1969 को राजस्थान उद्योग व खनिज विकास निगम(RIMDC) की स्थापना की गई। नवंबर 1979 को इसका विभाजन करके राजस्थान राज्य खनिज विकास निगम(RSMDC) तथा 1980 में रीको की स्थापना की गई।

मुख्यालय  -जयपुर

कार्य – 1.औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना एवं विकास करना
2.लघु मध्यम एवं वृहत्त उद्योग को दीर्घकालीन वित्तीय सहायता प्रदान करना

2 राजस्थान वित्त निगम  ( RFC-Rajasthan Finance Corporation )

स्थापना  -1955

मुख्यालय  -जयपुर

 कार्य -1.लघु एवं मध्यम इकाइयों को मध्य मध्यकालीन वित्तीय सहायता प्रदान करना
2.केंद्र सरकार और राज्य सरकार तथा वित्तीय संस्थाओं में के प्रतिनिधि के रूप में कार्य

RFC की योजनाएं
1.SEMFEX-Self employment for ex-servicemen- भूतपूर्व सैनिकों की स्वरोजगार हेतु ऋण उपलब्ध करवाना

2. शिल्प बाड़ी-बॉडी ग्रामीण व शहरी शिल्पियों दस्तकारों की सहायता

3. महिला उद्यम निधि -उद्यमी महिलाओं को स्वरोजगार हेतु ऋण उपलब्ध कराना

4.”टेक्नोक्रेट स्कीम” तकनीक शिक्षा प्राप्त युवाओं को स्वरोजगार हेतु

5.फ्लैक्सी ऋण योजना- उद्यमियों को प्रोत्साहन देने हेतु

3 राजसीको (RAJSICO- Rajasthan state small industrial Corporation)

स्थापना -1961

मुख्यालय– जयपुर

कार्य 

  1. लघु व कुटीर उद्योगों का विकास करना
  2. इनको कच्चा माल तकनीकी वित्तीय एवं विपणन संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराना
  3. लघु व वृहत्त उद्योगों के मध्य समन्वय स्थापित करना

4 ग्रामीण कृषि विकास संस्थान ( RUDA- rural non agriculture development agency )

स्थापना- 1995

मुख्यालय- जयपुर

कार्य- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को विकसित करना

विश्व आर्थिक क्षेत्र ( SEZ )

सेज विधेयक,2015 पारित : राजस्थान विशेष आर्थिक जोन (सेज) विधेयक 2015 को विधानसभा में पारित कर दिया गया। विधेयक में सेज से जुड़े समस्त कार्य अलग एजेंसियों के बजाय ?विकास आयुक्त के क्षेत्राधिकार? में रखे गए है। विकास आयुक्त को श्रम आयुक्त की शक्तियां प्रदत्त की गई

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Specially thanks to ( With Regards )

दिनेश मीना, झालरा टोंक, प्रभुदयाल मूण्ड चूरु, 

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