अधिगम अक्षम बालक ( Learning disabled child )

  • औसत विद्यालय उपलब्धि से निम्न का प्रदर्शन
  • निष्पादन संबंधी कठिनाई से युक्त।
  • बिना सोचे – विचारे कार्य करना
  • उपयुक्त आचरण नहीं करना
  • निर्णयात्मक क्षमता का अभाव
  • स्वयं के प्रति लापरवाही
  • लक्ष्य से आसानी से विचलित होना
  • सामान्य ध्वनियों एवं दृश्यों के प्रति आकर्षण
  • ध्यान कम केन्द्रित करना या ध्यान का भटकाव
  • भावात्मक अस्थिरता
  • एक ही स्थिति में शांत एवं स्थिर रहने की असमर्थता
  • स्वप्रगति के प्रति लापरवाही बरतना
  • सामान्य से ज्यादा सक्रियता
  • गामक क्रियाओं में बाधा
  • कार्य करने की मंद गति
  • सामान्य कार्य को संपादित करने के लिए एक से अधिक बार प्रयास करना
  • पाठ्य सहगामी क्रियाओं में शामिल नहीं होना
  • क्षीण स्मरण शक्ति का होना
  • बिना बाहय हस्तक्षेप के अन्य गतिविधियों में भाग लेना में असमर्थ होना तथा
  • प्रत्यक्षीकरण संबंधी दोष।

अधिगम अक्षमता का वर्गीकरण ( Classification of learning disabilities )

इसका प्रमुख विभेदीकरण ब्रिटिश कोलंबिया एवं ब्रिटेन के शिक्षा मंत्रालय द्वारा प्रकाशित पुस्तक सपोर्टिंग स्टूडेंट्स विद लर्निंग डिएबलिटी ए गाइड फॉर टीचर्स में दिया गया है, जो निम्नलिखित है –

  • Dyslexia ( पढ़ने संबंधी विकार )
  • Disgraficica डिस्ग्राफिया (लेखन संबंधी विकार)
  • Disclosure डिस्कैलकूलिया (गणितीय कौशल संबंधी विकार)
  • Dysphagia डिस्फैसिया (वाक् क्षमता संबंधी विकार)
  • Dyspraxia डिस्प्रैक्सिया (लेखन एवं चित्रांकन संबंधी विकार)
  • Dysarthographia डिसऑर्थोग्राफ़िय (वर्तनी संबंधी विकार)
  • Auditory processing disorder ऑडीटरी प्रोसेसिंग डिसआर्डर (श्रवण संबंधी विकार)
  • Visual perception disorder विजुअल परसेप्शन डिसआर्डर (दृश्य प्रत्यक्षण क्षमता संबंधी विकार)
  • Sensitive integration and processing disorder सेंसरी इंटीग्रेशन ऑर प्रोसेसिंग डिसआर्डर (इन्द्रिय समन्वयन क्षमता संबंधी विकार)
  • Organizational Learning disorder ऑर्गेनाइजेशनल लर्निंग डिसआर्डर (संगठनात्मक पठन संबंधी विकार)

सृजनात्मक बालक ( Creative child )

सृजनात्मकता का अर्थ है -सृजन करना,बनाना,उत्पन्न करना,आदि .

जेम्स ड्रेवर -“ अनिवार्यतः किसी नई वस्तु का सृजन करना ही सृजनात्मकता है “.

गिल्फोर्ड के अनुसार सृजनात्मकता के तत्व निम्नलिखित है –

1 तात्कालिक /वर्तमान से हटकर दूरदर्शी चिंतन का मूर्त रूप देना .
2.समस्या की पुनर्व्याख्या .
3.असामान्य किन्तु प्रासंगिक विचारों से सामंजस्य .
4.अन्य के विचारो में सार्थक /रचनात्मक परिवर्तन.

सृजनात्मक बालक की पहचान ( Creative child’s identity )

  • मौलिकता के दर्शन होते है 
  • स्वतंत्र निर्णय की क्षमता 
  • परिहास प्रिय
  • उत्सुकता 
  • संवेदनशीलता 
  • स्वायत्ता 

सृजनात्मकता परिक्षण ( Creativity Test )

  • चित्रपुर्ती करना 
  • पी आई टी -प्रोडक्ट इम्प्रूवमेंट टास्क 
  • वृत्त-परिक्षण -सर्किल टेस्ट -वृत्त में चित्र बनाना .
  • अनुपयोगी वस्तुओ जैसे-टीन के डिब्बे,बोतले आदि से संस्थापन.

सृजनात्मकता विकास ( Creativity development )

  • शिक्षक को सृजनात्मकता परिक्षण करना चाहिए , और सृजन -क्षमता वाले बालकों को सूचीबद्ध करना चाहिए.
  • रचनात्मक गतिविधिया आयोजित करनी चाहिए.
  • मौलिक प्रदर्शन के अवसर देने चाहिए .
  • बुलेटिन बोर्ड सजाना, कक्षा-पत्रिका, कार्नर आदि तैयार करवाना.
  • सृजनात्मकता परिक्षण के लिए भारत के पासी और बाकर मेहंदी जाने जाते है.

 

Quiz 

Question – 17

[wp_quiz id=”5462″]

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

रमेश डामोर डूंगरपुर, P K Nagaur, S.R. BUNKAR, निर्मला कुमारी, जयराम, सुरेश कुमार सैनी

5 thoughts on “Specific Children Identification ( विशिष्ट बालकों की पहचान व शिक्षा )”

  1. बहुत बहुत आभार आपका गुरुदेव , आपका यह प्रयास हमारी सफलता का मिल का पत्थर साबित होगा ।
    एक बार दिल से शुक्रिया 🙏🙏🙏

Leave a Reply