घर्षण आवेश उत्पन्न नहीं करता है । वस्तुतः घर्षण की प्रक्रिया में दो विद्युत रोधी वस्तुओं में एक वस्तु से दूसरी वस्तु में कुछ विशिष्ट आवेश कणों का स्थानांतरण होता है ।फलस्वरुप एक वस्तु धनावेशित और दूसरी ऋण आवेशित हो जाती है।

विजातीय आवेश एक दूसरे को आकर्षित तथा सजातीय आवेश एक दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं! आवेश संरक्षण नियमानुसार विलगित निकायो में कुल आवेश निकाय में किसी प्रक्रिया संपन्न होने के उपरांत भी परिवर्तित नहीं होता है ।

आवेश अदिश राशि है किसी निकाय में कुल आवेश निकाय मैं इनके बीजगणितीय योग से प्राप्त होता है विद्युत विभव उस कार्य के बराबर है जो इकाई धनावेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र में लाने में करना होता है । इसकी इकाई वोल्ट है ।

विद्युत क्षेत्र में इकाई धनावेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किए गए कार्य को इन बिंदुओं के बीच विद्युत विभवांतर कहते हैं !

विधुत स्थितिज ऊर्जा ( Stateless Potential Energy ) :- अनंत से किसी आवेश को दूसरे आवेश के विद्युत क्षेत्र में इससे R दूरी पर लाने में दूसरे आवेश की तीव्रता के विरुद्ध किया गया कार्य, आवेश तंत्र की स्थितिज ऊर्जा होती है ।

समविभव पृष्ठ :- वह पृष्ठ जिसके किन्ही दो बिंदुओं के बीच विभवांतर शून्य हो ।

विद्युत द्विध्रुव :-वह निकाय जिसमें दो बराबर परंतु विपरीत प्रकार के बिंदु आवेश एक दूसरे से अल्प दूरी पर स्थित होते हैं!

विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण:- द्विध्रुव के आवेश के परिमाण एवं इसके दो बिंदु आवेशों के मध्य दूरी के गुणनफल को कहते हैं ! द्विध्रुव आघूर्ण की दिशा ऋण आवेश से धन आवेश की ओर इंगित होती है!

 

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No of Questions-15

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Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

धर्मराज जी मीना, निर्मला कुमारी

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