प्रथम विश्वयुद्ध के बाद 1929 में राष्ट्र संघ का गठन किया गया था।  राष्ट्र संघ काफ़ी हद तक प्रभावहीन था और संयुक्त राष्ट्र का उसकी जगह होने का यह बहुत बड़ा फायदा है  कि संयुक्त राष्ट्र अपने सदस्य देशों की सेनाओं को शांति संभालने के लिए तैनात कर सकता है।

संयुक्त राष्ट्र के बारे में विचार पहली बार द्वितीय विश्वयुद्ध के समाप्त होने के पहले उभरे थे।  द्वितीय विश्व युद्ध में विजयी होने वाले देशों ने मिलकर कोशिश की कि वे इस संस्था की संरचन,सदस्यता, आदि के बारे में कुछ निर्णय कर पाए।

24 अप्रैल 1945 को, द्वितीय विश्वयुद्ध के समाप्त होने के बाद, अमेरिका के सैन फ्रैंसिस्को में अंतराष्ट्रीय संस्थाओं की संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन हुई और यहां सारे 40 उपस्थित देशों ने संयुक्त राष्ट्रिय संविधा पर हस्ताक्षर किया। पोलैंड इस सम्मेलन में उपस्थित तो नहीं थी, पर उसके हस्ताक्षर के लिए खास जगह रखी गई थी और बाद में पोलैंड ने भी हस्ताक्षर कर दिया।

सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी देशों के हस्ताक्षर के बाद संयुक्त राष्ट्र की अस्तित्व हुई। 2006 तक संयुक्त राष्ट्र में 192 सदस्य देश है। विश्व के लगभग सारी मान्यता प्राप्त देश सदस्य है। कुछ विषेश उपवाद तइवान (जिसकी स्थिति चीन को 1971 में दे दी गई थी), वैटिकन, फ़िलिस्तीन ( जिसको दर्शक की स्थिति का सदस्य माना जा सक्ता है )

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय :-

संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में पचासी लाख डॉलर के लिए खरीदी भूसंपत्ति पर स्थापित है।  इस इमारत की स्थापना का प्रबंध एक अंतर्राष्ट्रीय शिल्पकारों के समूह द्वारा हुआ। इस मुख्यालय के अलावा और अहम संस्थाएं जनीवा,कोपनहेगनआदि में भी है।

यह संस्थाएं संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अधिकार क्षेत्र तो नहीं हैं, परंतु उनको काफ़ी स्वतंत्रताएं दी जाती है। तथा और कुछ देश। सबसे नए सदस्य देश है माँटेनीग्रो, जिसको 28 जून,2006 को सदस्य बनाया गया।

संयुक्त राष्ट्र लीग

उद्देश्य

संयुक्त राष्ट्र के व्यक्त उद्देश्य हैं युद्ध रोकना, मानव अधिकारों की रक्षा करना, अंतर्राष्ट्रीय कानून को निभाने की प्रक्रिया जुटाना, सामाजिक और आर्थिक विकास[6]उभारना, जीवन स्तर सुधारना और बिमारियों से लड़ना।

सदस्य राष्ट्र को अंतर्राष्ट्रीय चिंताएं और राष्ट्रीय मामलों को सम्हालने का मौका मिलता है। इन उद्देश्य को निभाने के लिए 1948 में मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा प्रमाणित की गई। मानव अधिकार द्वितीय विश्व युद्ध के जातिसंहार के बाद, संयुक्त राष्ट्र ने मानव अधिकारों को बहुत आवश्यक समझा था।

ऐसी घटनाओं को भविष्य में रोकना अहम समझकर, 1948 में सामान्य सभा ने मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा को स्वीकृत किया।  यह अबंधनकारी घोषणा पूरे विश्व के लिए एक समान दर्जा स्थापित करती है, जो कि संयुक्त राष्ट्र समर्थन करने की कोशिश करेगी।

15 मार्च 2006 को, सामान्य सभा ने संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकारों के आयोग को त्याग कर संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद की स्थापना की।आज मानव अधिकारों के संबंध में सात संघ निकाय स्थापित है।

यह सात निकाय हैं-:

  • 1. मानव अधिकार संसद
  • 2. आर्थिक सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों का संसद
  • 3. जातीय भेदभाव निष्कासन संसद
  • 4. नारी विरुद्ध भेदभाव निष्कासन संसद
  • 5. यातना विरुद्ध संसद
  • 6. बच्चों के अधिकारों का संसद
  • 7. प्रवासी कर्मचारी संसद

 

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No of Questions-09

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प्रभुदयाल मूण्ड चूरु, दिव्या, बूंदी, रविकांत दिवाकर

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