उत्तर प्रदेश: सांस्कृतिक तत्व (कला, उत्सव, मेले, पर्व आदि) Uttar Pradesh cultural elements

उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक परिधि के अंतर्गत बृज, अवध, भोजपुरी, बुंदेलखंड, रूहेलखंड आदि क्षेत्र स्थित है। सरकार ने वर्ष 1957 में संस्कृति विभाग की स्थापना की। इस विभाग के अंतर्गत कार्यशील कुछ प्रमुख संस्थाएं इस प्रकार है-

भातखंडे संगीत संस्थान- पंडित विष्णु नारायण भातखंडे के प्रयास से लखनऊ में 15 जुलाई 1926 को मैरिस कॉलेज ऑफ हिंदुस्तानी म्यूजिक की नींव पड़ी। 1960 में इसका नाम भातखंडे हिंदुस्तानी संगीत महाविद्यालय रखा गया। भारत सरकार द्वारा 24 अक्टूबर 2000 को इस महाविद्यालय को डीम्ड विश्वविद्यालय का स्तर प्रदान कर दिया गया और इसका नाम परिवर्तित करके भातखंडे संगीत संस्थान लखनऊ कर दिया गया।

राज्य ललित कला अकादमी लखनऊ- इसकी स्थापना 8 फरवरी 1962 को संस्कृति विभाग के अधीनस्थ पंचम वित्त पोषित स्वायत्तशासी संस्था के रूप में की गई थी।

भारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ- नाट्यकला में प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से भारतेंदु नाट्य अकादमी की स्थापना अगस्त 1975 में लखनऊ में हुई थी। यह संस्कृति विभाग के अंतर्गत स्वायत्तशासी संस्था के रूप में कार्य कर रहा है।

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी- इसकी स्थापना 13 नवंबर 1963 को लखनऊ में की गई। यह अकादमी संगीत, नृत्य, नाटक, लोक संगीत, लोक नाट्य की परंपराओं के प्रचार-प्रसार, संवर्धन एवं परिरक्षण का महत्वपूर्ण कार्य करती है।

राष्ट्रीय कथक संस्थान लखनऊ- इसकी स्थापना संस्कृति विभाग के अंतर्गत 1988-89 में हुई। मई 2010 से यह संस्थान लखनऊ विश्वविद्यालय से संबंध हो गई है। अब यह स्नातक की डिग्री भी देती है।

अयोध्या शोध संस्थान- इसकी स्थापना 18 अगस्त 1986 को तुलसी स्मारक भवन अयोध्या में की गई थी। इसका उद्देश्य सामान्य रूप से अवध व विशिष्ट रूप से अयोध्या की कला, साहित्य, लोक साहित्य, इतिहास व परंपराओं की पांडुलिपियों तथा वस्तु और शिल्प तथ्यों का संग्रह, संरक्षण व अध्ययन करना है।

?स्थापत्य कला?

प्राचीन काल-

प्रदेश में स्थापत्य कला के प्राचीनतम अवशेष मौर्यकालीन है जिनका निर्माण चुनार के बलुआ पत्थरों से हुआ था। इस काल के मुख्य विशेष शिला स्तंभ एवं स्तूप है जिसमें सारनाथ का सिंह स्तंभ मौर्यकालीन कला का सर्वश्रेष्ठ नमूना है। मथुरा के परखम, बोरदा तथा कतिपय तथा अन्य स्थानों से भी यक्ष एवं यक्षिणियों की विशाल प्रतिमा मिली है जो कि अशोक कालीन है। कुषाण काल में मथुरा कला शैली अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंच गई। मंदिर निर्माण कला का विकास गुप्त काल में हुआ। इस समय के मंदिरों में देवगढ़(झांसी) का पत्थर निर्मित मंदिर, भीतरगांव(कानपुर) और भीतरी(गाजीपुर) के ईंट निर्मित मंदिर विशेष रूप से जाने जाते हैं। इस काल के मृतिका द्वारा निर्मित मूर्तियों के कुछ उत्कृष्ट नमूने राजघाट(वाराणसी), सहेत-महेत(गोंडा-बहराइच), भीतरगांव(कानपुर), अहिचित्र(बरेली) आदि स्थानों से मिले हैं।

मध्याकाल-

मध्य काल के शुरू में जौनपुर के शर्की शासकों के संरक्षण में स्थापत्य के शर्की शैली का विकास हुआ। यहां के निर्माण में अटाला मस्जिद, खालिस मुखलिस, झंझरी और लाल दरवाजा मुख्य है। बाबर ने अयोध्या और संभल में मस्जिदे बनवाई। आगरा का ताजमहल भी इसी काल में बना। इस काल की प्रमुख विशेषता है- लाल बलुआ पत्थर एवं संगमरमर का उपयोग, चिकने और रंग बिरंगे फर्श पर महीन पच्चीकारी, तथा जड़ाऊ काम। शाहजहां द्वारा बनवाई गई ताजमहल का पूरा निर्माण मकराना संगमरमर से हुआ है जो की स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना है।

आधुनिक काल-

आधुनिक काल में अवध के नवाबों एवं अंग्रेजों द्वारा अनेक निर्माण कराए गए। लखनऊ की प्रमुख इमारतें जो कि अवध के नवाबों द्वारा बनवाई गई है इस प्रकार है- आस्फुददोलला का इमामबाड़ा, केसर बाग स्थित मकबरा, लाल बारादरी, रेजीडेंसी, रूमी दरवाजा, शाहनजफ, हुसैनाबाद का इमामबाड़ा, छतर मंजिल, मोती महल, केसरबाग स्थित महल, दिलकुशा उद्यान तथा सिकंदरबाग
● आस्फुददोला द्वारा बनवाए गए बड़े इमामबाड़े का मेहराबदार हाल विशुद्ध लखनऊ कला का नमूना है। माना जाता है कि यह विश्व में अपने ढंग का सबसे बड़ा हाल है।

चित्रकला व मूर्तिकला

  • प्रदेश में मिर्जापुर- सोनभद्र के लिखनियान्दरी, मानिकपुर, होशंगाबाद, जोगीमारा, रायगढ़ आदि स्थलों की गुफाओं में प्राचीन शैल चित्रकारी के कुछ नमूने प्राप्त हुए हैं।
  • मध्यकाल में प्रदेश की प्रमुख चित्रकला शैली मुगल शैली (आगरा शैली) थी जिसकी नींव हिमायू द्वारा रखी गई थी। उसने फारस से मीर सैयद अली और ख्वाजा अब्दुससमद नामक चित्रकारों को अपने साथ भारत लाया था। अब्दुस समद के चित्र गुलशन चित्रावली में संकलित है।
  • जहांगीर के समय मुगल चित्रकला अपने चरमोत्कर्ष (मुगल चित्रकला का स्वर्ण युग) पर था। इसने आगरा में एक चित्रशाला बनवाया।
  • मथुरा में जैन चित्रकला का विकास हुआ।
  • प्रदेश में आधुनिक चित्रकला का विकास बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में तब शुरू हुआ जब 1911 में लखनऊ में कला एवं शिल्प महाविद्यालय की स्थापना की गई। 1949 में लखनऊ नगर नगर निगम आर्ट गैलरी की स्थापना की गई। 1962 में ललित कला अकादमी,लखनऊ की स्थापना की गई।
  • 1920 में वाराणसी में भारतीय कला परिषद की स्थापना की गई।
  • 1950 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय में भारतीय कला भवन की स्थापना की गई जो भारत के विशाल चित्रकला का संग्रहालय में से एक है।
  • 1925 में बंगाल के असित कुमार हल्दार जो कि अवनि बाबू और टैगोर के शिष्य थे, लखनऊ आए और कला एवं शिल्प महाविद्यालय के प्रथम भारतीय प्राचार्य बने। उन्होंने लखनऊ में चित्रकला की वाश तथा टेम्पा नामक दो नई शैलियां शुरू की जो बाद में लखनऊ शैली के रूप में विकसित हुआ।
  • 50 के दशक में प्राचार्य रहे हरिहर लाल मेढ़ ने अपने दृश्य चित्र, दैनिक जीवन पर आधारित चित्र, और वाश चित्रकला शैली में चित्रित मेघदूतम् श्रंखला के कारण अपार ख्याति अर्जित की।
  • 1956 में प्राचार्य सुधीर रंजन खास्तगीर को इस महाविद्यालय का सूर्य कहा जाता है।
  • मेरठ निवासी चमन सिंह चमन ने चित्रकला एवं मूर्तिकला पर 50 से अधिक पुस्तक लिखकर तथा सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय चित्र प्रदर्शनी का आयोजन करके विशेष ख्याति अर्जित की है। प्रख्यात चित्रकार किरण उनकी धर्मपत्नी है।
  • जगन्नाथ मुरलीधर अहिवासी को राज्य के विधानसभा में भित्ति चित्र चित्रित करने का गौरव प्राप्त है।
  • भवानी चरण ग्यू की सुप्रसिद्ध चित्र रामलीला है।
  • रामचंद्र शुक्ल के प्रमुख चित्र है- पश्चाताप, आकांक्षा, प्रतिशोध, दया, मौत की आंखें, रोगी का स्वपन, शेष अग्नि, सृष्टि और ध्वंस, पराजय की पीड़ा आदि।
  • राज कपूर चितेरा(इलाहाबाद) ने तेंदुलकर की 1500 फीट लंबी चित्र श्रंखला बनाई है।
  • विश्वनाथ मेहता के प्रसिद्ध चित्र है- प्यासा ऊंट, सुहाग बिंदी व सृष्टि आदि।
  • सत्यम शिवम सुंदरम शिवनंदन नौटियाल का प्रसिद्ध चित्र है।

संगीत कला

  • भरतमुनि ने नाट्यशास्त्र की रचना की जिसे संगीत का बाइबिल कहा जाता है।
  • जाटको के अनुसार भगवान बुद्ध के समकालीन कौशांबी नरेश मीणा के निपुण वादक थे।
  • खुसरो ने तबला तथा सितार का आविष्कार किया उनका सितार परितंत्र वीणा का ही एक सम्मानित रूप था।
  • सूरदासी मल्हार के प्रणेता सूरदास जी माने जाते हैं।
  • वृंदावन में प्रत्येक वर्ष स्वामी हरिदास संगीत सम्मेलन व ध्रुवपद मेले का आयोजन होता है।

आगरा घराना- मुगल काल में आगरा संगीत का सबसे बड़ा केंद्र था। इस घराने का सूत्रपात करता श्यामरंग और सरसरंग को माना जाता है।इस घराने के गायक ख्याल के साथ ही ध्रुपद तथा धमार में पारंगत थे। इस घराने के गायक में फैयाज खान, पंडित विश्वंभरदीन, भास्करबुवा बखले, स्वामी वल्लभदास, गोविंद राम टेंबे, जगन्नाथ बुवा, सी आर व्यास, केजी गिन्दे, दीपाली नाग, मदुरै रामास्वामी आदि मुख्य है

आगरा घराने की दूसरी शाखा में ख्याल एवं ठुमरी गायन के प्रधानता थी। इसे कव्वाल बच्चा घराना भी कहते हैं। मोहम्मद खान, रहमत खान, सादिक अली खान आदि इस घराने के प्रमुख संगीतज्ञ थे।

लखनऊ घराना- अवध के नवाब वाजिद अली शाह एक संगीत मर्मज्ञ, कलाप्रेमी और संगीतज्ञ थे। उनके शासनकाल को अवध की कला की दृष्टि से स्वर्ण युग कहा जा सकता है। यह घराना ख्याल में ध्रुपद गायन के लिए प्रसिद्ध है।

खुर्शीद अली खान लखनऊ ख्याल गायकी के पितामह माने जाते हैं।  मियां गुलाम नबी सोरी ने टप्पा शैली का प्रवर्तन किया। गजल की बेगम अख्तर इसे घराने की थी। सादिक अली खान वीणा एवं अली खान सारंगी के बेजोड़ वादक थी। मोदू खान व बख्शूर खान ने तबले के लखनऊ घराने का सूत्रपात किया 

वाजिद अली शाह के काल से ठुमरी को काफी लोकप्रियता मिलने लगी। उन्होंने स्वयं अख्तर पिया उपनाम से और उनके दरबारी बिंदानीन ने सनद पिया उपनाम से ठुमरी को बंदिशें तैयार की। बिंदनीन के बाद शंभू महाराज, लच्छू महाराज, बिरजू महाराज, कालका महाराज, अच्छन महाराज आदि ने कथक शैली को नई दिशा दी।

रामपुर घराना- इस घराना के संस्थापक नेमत खान सदारंग और उनके शिष्य थे। अमीर खुसरो द्वारा शुरू की गई ख्याल गायकी को इस घराने ने बुलंदियों पर पहुंचा दिया। इस घराने के गायक में वजीर खान, उस्ताद बहादुर हुसैन, उस्ताद अमीर खान, उस्ताद वजीर खान, उस्ताद नजीर खान आदि प्रमुख थे।

भिंडी बाजार घराना- मुरादाबाद के छज्जू खान, नजीर खान व खादिम हुसैन खान के मुंबई के भिंडी बाजार में जाकर बस जाने से इस घराने की स्थापना हुई। लता मंगेशकर ने इसे घराने के अली खान से संगीत की शिक्षा ली थी।

इटावा घराना- इसे गौरीपुर घराना भी कहते हैं। यह घराना सितार वादन के लिए विशेष तौर पर जाना जाता है। सुरजन सिंह, तुराब खान, इमदाद खान, इनायत खान, विलायत खान, ध्रुव तारा जोशी आदि इस गाने का प्रमुख वादक है।

उत्तर प्रदेश के मेले

  • कुंभ का मेला :प्रत्येक 12 वर्ष (प्रयाग में)
  • अर्ध कुंभ मेला: प्रत्येक 6 वर्ष (प्रयाग में)
  • माघ मेला :प्रत्येक वर्ष माघ में (प्रयाग में)
  • ककोरा मेला: बदायूं (रूहेलखंड का मिनी कुंभ)
  • रामनगरिया मेला :फर्रुखाबाद (गंगा तट)
  • बटेश्वर मेला (पशु मेला) :आगरा (ऊंट मेला)
  • ददरी मेला पशु मेला :बलिया (कार्तिक पूर्णिमा)
  • सरधना मेला: सरधना मेरठ (नवंबर)
  • नौचंदी मेला: मेरठ
  • गढ़मुक्तेश्वर मेला: हापुड़ (कार्तिक पूर्णिमा)
  • कंस मेला: मथुरा एवं फतेहपुर सीकरी में
  • हरिदास जयंती मेला: निधिवन वृंदावन मथुरा
  • मुड़िया मेला :वृंदावन (मथुरा)
  • देवा शरीफ मेला :बाराबंकी (कार्तिक)
  • श्रृंगी रामपुर मेला: फर्रुखाबाद (दशहरा एवं कार्तिक पूर्णिमा)
  • मकनपुर मेला :फर्रुखाबाद
  • सैयद सालार मेला: बहराइच
  • ढाई घाट मेला: शाहजहांपुर
  • खारी झल्लू कार्तिक मेला: बिजनौर
  • चैत रामनवमी मेला: अयोध्या
  • कार्तिकेय परिक्रमा मेला: अयोध्या फैजाबाद
  • परिक्रमा मेला : नैमिषारण्य सीतापुर (फाल्गुन में)
  • गोला गोकरनाथ मेला: खीरी (मकर संक्रांति)
  • बाल सुंदरी देवी मेला: अनूपशहर (बुलंदशहर)
  • कालिंजर मेला: बांदा
  • देवी पाटन मेला :बलरामपुर
  • श्रावणी मेला: सकिंसा फर्रुखाबाद
  • श्रावणी एवं जन्माष्टमी मेला: मथुरा
  • नवरात्रि एवं गणगौर मेला: आगरा
  • कैलाश मेला :आगरा (सावन के तीसरे सोमवार को)
  • नक कटैया मेला :चेतगंज वाराणसी दशहरा
  • रथयात्रा मेला :वाराणसी
  • शाकुंभरी देवी मेला: सहारनपुर नवरात्र
  • गोविंद साहब मेला: अंबेडकरनगर
  • खिचड़ी मेला: गोरखपुर मकर संक्रांति
  • रामायण मेला:अयोध्या चित्रकूट व श्रृंगवेरपुर
  • सोरों मेला : कासगंज
  • झूला मेला : मथुरा अयोध्या (श्रावण में)
  • ध्रुपद मेला : वृंदावन एवं वाराणसी
  • विंध्याचल देवी मेला: मिर्जापुर नवरात्रि
  • देव छठ मेला : दाऊजी मथुरा

Uttar Pradesh cultural elements important facts and Quiz

  • प्रदेश के प्रमुख सांस्कृतिक क्षेत्र: ब्रज अवध बुंदेलखंड रूहेलखंड तथा भोजपुरी क्षेत्र
  • प्रदेश में स्थापत्य कला के प्राचीनतम नमूने प्राप्त होते हैं: मौर्यकालीन सारनाथ कौशांबी कुशीनगर आदि स्थानों से
  • मंदिर निर्माण कला का विकास हुआ: गुप्त काल में
  • गुप्तकालीन मंदिरों के साक्ष्य मिलते हैं देवगढ़ (झांसी), भीतरगांव (कानपुर) तथा भितरी (गाजीपुर) से
  • मध्य काल में स्थापत्य कला की दो प्रमुख शैलियां: शर्की और मुगल (आगरा)शैली
  • मध्य काल की प्रमुख चित्रकला शैलियां: मुग़ल आगरा मथुरा ब्रज तथा बुंदेलखंडी शैली
  • मध्य काल के प्रमुख संगीतकार: स्वामी हरिदास, कश्यप, शादुर्ल, दत्तिल, मातगम, अभिनवगुप्त, हरीपाल,अमीर खुसरो ,अदारंग, सदारंग ,वाजिद अली शाह, तानसेन, बैजू ,हुसैन शर्की आदि
  • मुगल चित्रकला शैली की नींव रखी: हुमायूं ने
  • मुगल चित्रकला की शैली का स्वर्ण काल: जहांगीर काल
  • शर्की शैली का सर्वोत्कृष्ट नमूना : अटाला मस्जिद (जौनपुर)
  • मुगल शैली का सर्वोत्कृष्ट नमूना: ताजमहल
  • आधुनिक काल में स्थापत्य कला की प्रमुख शैली : लखनऊ शैली
  • लखनऊ शैली का विशुद्ध नमूना: बड़े इमामबाड़े का हाल
  • चित्रकला के प्राचीनतम नमूने: मिर्जापुर सोनभद्र के सोनकढा व लिखनियादरी,मानिकपुर जोगीमारा,होशंगाबाद,रायगढ़ आगे स्थलों के शैलों पर एवं गुफाओं में।
  • काशी नरेश के संरक्षण में विकसित चित्रकला शैली : अपभ्रंश तथा कंपनी शैली
  • आधुनिक चित्रकला की प्रमुख शैलियां: वाश टेम्पा या लखनऊ शैली
  • लखनऊ चित्रकला शैली के जनक: असित कुमार हल्दार
  • ईरानी-फारसी व भारतीय रागों का मिश्रण किया :अमीर खुसरो ने
  • प्रदेश के प्रमुख संगीत घराने: आगरा, लखनऊ, वाराणसी, सहारनपुर, रामपुर,किराना (मुजफ्फरनगर) ,अतरौली (अलीगढ़) एवं खुर्जा (अलीगढ़) घराना आदि
  • संगीत की दृष्टि से लखनऊ घराने का स्वर्ण काल : वाजिद अली शाह का काल
  • वाजिद अली शाह के काल में काफी लोकप्रिय हुआ : ठुमरी
  • वाजिद अली शाह ठुमरी की बंदिशें तैयार की : अख्तर पिया उपनाम से
  • वाजिद अली शाह के दरबार में रहते थे : बिंदादीन कथक एवं कोदोउ सिंह (पखावजी)
  • कथक नृत्य में ठुमरी गायन का समावेश किया : बिंदादीन ने
  • शाहजहांपुर एवं इटावा गौरीपुर घराना प्रसिद्ध है : सरोद वादन के लिए
  • अजराड़ा(मेरठ) घराना प्रसिद्ध है : तबला वादन के लिए
  • तबले के लखनऊ घराने का सूत्रपात किया: मोदु एवं बख्शूर खा
  • प्रदेश का एकमात्र शास्त्रीय नृत्य: कथक
  • कथक के लिए प्रसिद्ध घराने: लखनऊ एवं वाराणसी
  • कव्वाली, तराना, कौलकलवाना आदि शैलियों की खोज की : अमीर खुसरो ने
  • मंदिरों में संगीतबद्ध अर्चना पद्धति की शुरुआत की : वल्लभाचार्य ने
  • प्रसिद्ध संगीतज्ञ भक्त कथा वृंदावन (निधिवन)निवासी स्वामी हरिदास की संगीत बद्ध रचनाएं हैं : श्रीकेलीमाली व अष्टादश पद
  • कृष्ण भक्त स्वामी हरिदास प्रसिद्ध है: ध्रुवपद गायन के लिए
  • तानसेन बैजू गोपाल आदि 8 शिष्य थे: स्वामी हरिदास के
  • अकबर के दरबारी तानसेन पारंगत थे :राग दीपक व वीणा वादन में
  • बैजू पारंगत थे :राग मेघ में
  • बड़े ख्याल का परिवर्तन किया : सुल्तान हुसैन शर्की की (जौनपुर) ने
  • 2003 से पूर्व अनुसूचित जनजाति श्रेणी में सूचीबद्ध जनजातियां थी : दो (थारू एवं बक्सा)
  • 2003 में अनुसूचित जनजाति श्रेणी में सूचीबद्ध नई जनजातियां: 10
  • राज्य में कुल आकाशवाणी केंद्र: 13
  • राज्य में कुल दूरदर्शन केंद्र :03
  • राज्य में टेलीविजन सेवा की शुरुआत : 1975 में लखनऊ से
  • भारत की पहली बोलती फिल्म आलम आरा के निर्देशक थे : BP मिश्रा (देवरिया)
  • उत्तर प्रदेश चलचित्र निगम की स्थापना : 1975 में
  • फिल्म बन्धु उत्तर प्रदेश ऑन फिल्म विकास परिषद का गठन : 2001 में
  • लखनऊ के महान गायक मियां शौरी ने टप्पा गायकी शैली प्रचलित कि जो पंजाब की ‘हीर शैली गायकी’ पर आधारित है।
  • जौनपुर के सुल्तान हुसैन सरकी ने बड़ा ख्याल जैसी नई गायन शैली का आविष्कार किया।
  • अवध के महान संगीतज्ञ बिंदादीन महाराज ने कथक में ठुमरी गायन का समावेश किया।
  • महान गायक एवं संगीतज्ञ तानसेन के दमाद हहा जी सुल्तान ने ‘ख्याल गायकी’ क्यों नया रूप दिया।
  • आधुनिक शास्त्रीय गायन का पिता उस्ताद फैयाज खां को माना जाता है जिन्हें ‘आफताब ए मोसिकी’ (संगीत के सूर्य) उपाधि से सम्मानित किया गया है।
  • रामपुर के संगीतज्ञ वजीर अली खान ‘वीणा वादन’ में ख्याल पद्धति का प्रयोग करके ‘सैनिया घराने’ जैसे संगीत घराने को जन्म दिया।
  • पंडित राम सहाय, किशन महाराज ,कंठे महाराज आदि तबला वादक है तबला सम्राट पंडित समता प्रसाद मिश्रा (गुदाई महाराज) का संबंध हिंदुस्तानी शैली के बनारस घराने से है।
  • उदय शंकर एवं गोपीकृष्ण चौबे बनारस घराने के नर्तक हैं।
  • बनारस घराने की अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के सितार वादक भारत रत्न पंडित रविशंकर महान सितारा गए उस्ताद अलाउद्दीन खां के शिष्य हैं।
  • प्रसिद्ध ठुमरी गायिका छोटी मैंना, बढ़ी मैना रसूलन बाई एवं गिरिजा देवी बनारस घराने की है।
  • रोशनआरा,गंगूबाई हंगल, भीमसेन जोशी आदि किराना घराने के हैं।
  • शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खान एवं मुमताज खान बनारस घराने के हैं।
  • इटावा घराना सितार वादन के लिए प्रसिद्ध है।
  • किराना घराने के गंगूबाई हंगल को 2002 में पदम विभूषण मिला था।
  • ओंकार नाथ ठाकुर और डॉ एंन राजम वायलिन वादक है।
  • पखावज वादक कोदउ सिंह लखनऊ घराने के थे।
  • पखावज वादक शंभू महाराज बनारस घराने के थे।
  • टप्पा शैली की मीठी आवाज वाली जानकीबाई (छप्पन छुरी) इलाहाबाद की थी।
  • बांसुरी वादक हरिप्रसाद चौरसिया एवं रघुनाथ सेठ इलाहाबाद के हैं।

Play Quiz 

No of Questions-20

0%

Q.1 संगीत शिक्षा हेतु उत्तर प्रदेश का प्रथम संगीत महाविद्यालय है? UPPCS 2004

Correct! Wrong!

Q.2 उत्तर प्रदेश में जैन एवं बौद्ध धर्म दोनों का प्रसिद्ध तीर्थ है? यूपी पीसीएस मेंस 2003

Correct! Wrong!

Q.3 उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक केंद्र स्थित है? यूपी पीसीएस मेंस 2004 व 2015

Correct! Wrong!

Q.4 उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक पुरातात्विक एवं कलात्मक निधि की देखरेख करने के लिए स्थापित संस्कृति विभाग के कार्यों में कौन सा कार्य सम्मिलित नहीं है? UPPCS 2008

Correct! Wrong!

Q.5 भातखंडे संगीत संस्थान लखनऊ डीम्ड विश्वविद्यालय बना? पीसीएस मेंस 2009

Correct! Wrong!

Q.6 सुविख्यात चित्र सत्यम शिवम सुंदरम की रचना की थी? यूपी पीसीएस मेंस 2009

Correct! Wrong!

Q.7 चित्रकला की मुगल शैली का आरंभ किया था? यूपी पीसीएस मेंस 2009 तथा 2012

Correct! Wrong!

Q.8 कौन सा शास्त्रीय नृत्य उत्तर प्रदेश से संबंधित है? पीसीएस मेंस 2015

Correct! Wrong!

Q.9 शाकंभरी देवी मेले का आयोजन किया जाता है? पीसीएस मेंस 2015

Correct! Wrong!

Q.10 अमीर खुसरो ने किसके विकास में अग्रणी भूमिका निभाई? UPPCS 2002

Correct! Wrong!

Q.11 Karma किस क्षेत्र का लोक नृत्य है? यूपी पीसीएस मेंस 2005

Correct! Wrong!

Q.12 निम्न में से कौन सबसे प्राचीन वाद्य यंत्र है? UPPCS 1999

Correct! Wrong!

Q.13 तानसेन का मकबरा कहां है? UPPCS 2004

Correct! Wrong!

Q.14 ताज महोत्सव किस महीने में मनाया जाता है? UPPCS 2004

Correct! Wrong!

Q.15 निम्न में से कौन सा लोक नृत्य ब्रज क्षेत्र का है? यूपी पीसीएस प्री 2008

Correct! Wrong!

Q.16 लठमार होली मनाई जाती है? पीसीएस मेंस 2012

Correct! Wrong!

Q.17 मिर्जापुर प्रसिद्ध है? पीसीएस मेंस 2014

Correct! Wrong!

Q.18 उत्तर प्रदेश का मुख्य लोक नृत्य है? यूपी मेंस 2014

Correct! Wrong!

Q.19 सैयद सालार मेला कहां लगता है? यूपी पीसीएस मेंस 2011

Correct! Wrong!

Q.20 लोक नृत्य राहुला का संबंध यूपी के निम्न में से किस क्षेत्र से है? UPPCS 2008

Correct! Wrong!

Uttar Pradesh cultural elements Quiz ( उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक तत्व )
VERY BAD! You got Few answers correct! need hard work.
BAD! You got Few answers correct! need hard work
GOOD! You well tried but got some wrong! need more preparation
VERY GOOD! You well tried but got some wrong! need preparation
AWESOME! You got the quiz correct! KEEP IT UP

Share your Results:

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

चिराग बालियान मुज़फ्फरनगर, अनुराग शुक्ला सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश