तालाबो ,पोखरों,झीलों,एवं नदियों,से सिंचाई:-

उत्तर प्रदेश में सिंचाई के ये प्रमुख स्रोत है जिनमे बेडी, धकैंची आदि तकनीकों से सिंचाई की जाती थी।

कुओं द्वारा सिंचाई:-

प्रदेश के कोमल शैल तथा उनके जलस्तर वाले क्षेत्रो में कुओं की सिंचाई की परंपरा काफी प्राचीन है। कुँए से जल को बाहर निकलने के लिए रहट, मयदास, लिफ्ट, चैन, पंप,वाशर, हैंडपुम्प आदि साधनों से किसी का भी प्रयोग किया जाता था

गंडक व गंगा घाटी के मशवर्ती क्षेत्र में कुओ द्वारा सर्वाधिक सिंचाई की जाती है इसके अंर्तगत प्रदेश के गोंडा, बहराइच, बस्ती, फैजाबाद, सुल्तानपुर, आजमगढ़ बलिया, रायबरेली, प्रतापगढ़, मऊ आदि जिले में आते है।

नलकूप द्वारा सिंचाई;-

प्रदेश में सर्वाधिक सिंचाई इसी माध्यम से की जाती है नलकूप 20वी शताब्दी के देंन है प्रदेश में इसका प्रयोग 1930 में सर्वप्रथम मेरठ में शुरू हुआ

नहरों से सिंचाई:-

प्रदेश में सदवाहिनी नदियों की अधिकता होने के कारण नहरों का विकाश करना आसान है। लेकिन अन्य भागों की अपेक्षा पचिमी उत्तरप्रदेश में नहरों का आशिक विस्तार हुआ है। प्रदेश की मुख्य वृहद एवं मध्यम परियोजनाओं एवं नहर प्रणालियों में सृजित सिंकजै क्षमता का वैज्ञानिक ढंग से शीघ्र एवं अधिकतम उपयोग करते है।

शारदा सहायक समादेश के तहत शारदा नहर प्रणाली,  शरद सहायक नहर प्रणाली फेज 2, सरयू नहर प्रणाली फेज 1 व 2, सिरसी, नारायणपुर पम्प नहर, देवकलि पम्प नहर परियोजना सम्बन्धित है। दोनों समादेशो के तहत इस समय कुल 55 जिले सम्मलित है

ऊपरी गंगा नहर:-

इसका निर्माण 1840 से 1854 के बीच हुआ। इस नहर को हरिद्वार के समीप गंगा के दाहिने किनारे से निकाला गया है इसकी लम्बाई 340 किमी है,लेकि न शाखाओं -प्रशाखाओं सहित 5640 किमी है इससे आगरा नहर तथा निचली गंगा नहर को भी जल मिलता है। यह नहर सहारनपुर, मुज्जफरनगर, मेरठ, कानपुर, इटावा, मैनपुरी,आदि जिलों की लगभग 7 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करती है।

निचली गंगा नहर:-

1878 से निर्मित यह नहर नरोरा (बुलंदशहर) नामक स्थान पर गंगा से निकली गयी है इससे बुलन्दशहर, एटा,फिरोजाबाद, कानपुर,आदि जिलों की लगभग 4.5 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है।

रामगंगा नहर :-

उत्तरखंड के पौढ़ी जिले में कालागढ़ नामक स्थान पर रामगंगा नदी पर 1975 में 128 मि ऊंचा बांध और नहरों का निर्माण किया गया है।
इसमें उत्तखण्ड व उत्तर प्रदेश के बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर,आदि जिलों में लगभग 17.05 लाख एकड़ भूमि की सिंचाई की जाती है।

आगरा नहर :-

यह अन्तराजिय नहर 1874 में बनकर तैयार हुई।इसे दिल्ली के पास (ओखला) से यमुना के दाहिने किनारे से निकल गया है यह नहर दिल्ली , गुड़गांव मथुरा, आगरा,और भरतपुर,की लगभग 1.5 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करती है। यह दिल्ली, हरियाणा तथा राजस्थान से भी गुजराती है

पूर्वी यमुना नहर:-

यह राज्य की सबसे पुरानी नहर है इसका निर्माण 1830 में किया गया था यह फैजाबाद (सहारनपुर) नामक स्थान पर यमुना के बाएं किनारे से निकली गयी है, जिसकी कुल लम्बाई 1440 किमी है इस नहर के द्वारा सहारनपुर शामली, मुजफ्फरनगर, हापुड़, मेरठ, गाजियाबाद, दिल्ली की लगभग 2 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचाई की जाती है

यह शाहजंहा द्वारा खुदवाई गयी थी बाद में अंग्रेजो द्वारा विस्तार किया गया।

शारदा नहर:-

यह प्रदेश की सबसे बड़ी नहर प्रणाली है जिसका निर्माण 1920 से 1928 के बीच हुआ। यह चंपावत के वनवशा(उत्तर प्रदेश ,उत्तराखंड,व नेपाल सीमा पर) नामक स्थान पर शारदा(काली या महाकाली) नदी से निकली है।
इस नहर द्वारा उत्तराखण्ड के कुछ जिलों तथा उत्तरप्रदेश के पीलीभीत, बरेली, शाहजहापुर, लखीपुर, हरदोई, लखनऊ, इलाहाबाद आदि जिलों में सिंचाई होती है।

गंडक नहर :-

यह उत्तर प्रदेह और बिहार राज्य की एक सयुंक्त नहर प्रणाली है जो इन दोनों के सीमा बिंदु से 18 किमी अंदर नेपाल में बूढ़ी गंडक पर एक बांध बनाकर निकली गयी है।इससे कुशीनगर,महराजगंज,गोरखपुर,और देवरिया जिले में सिंचाई होती है

सरयू नहर :-

इसका उद्देश्य पूर्वांचल के बहराइच,श्रावस्ती,गोंडा, सिद्धार्थ नगर,बस्ती,गोरखपुर,महाराजपुर,जिलों में घाघरा,सरयू, व राप्ती नदियों के जल से सिंचाई उपलब्ध करवाना है इस परियोजना के तहत बहराइच जिले की नानपारा तहशील में कटरकनिया घाट के निकट घाघरा नदी पर एक बैराज बनाया गया है

1977-78 से निर्माणधिन इस परियोजना को अगस्त, 2012 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया।

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No of Questions-16

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Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

चिराग बालियान मुज़फ्फरनगर  उत्तर प्रदेश, अनुराग जी शुक्ला, सुल्तानपुर, रविकान्त दिवाकर कानपुर,उत्तर प्रदेश

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