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खनिज की दृष्टि से उत्तर प्रदेश निम्न मध्यम श्रेणी का राज्य है। यहां विंध्यक्रम की शैलो, बुंदेलखंडी क्षेत्रो, हिमालय श्रेणी के निचले भागों तथा कुछ नदी घाटियों में खनिज पाए जाते हैं। प्रदेश में 1955 में भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय की स्थापना की गई तथा 1974 में उत्तर प्रदेश राज्य खनिज विकास निगम की स्थापना की गई।

प्रदेश की पहली खनिज नीति दिसंबर 1998 में घोषित की गई जिस में खनिज विकास को उद्योग का दर्जा दिया गया। इस नीति में 12 जिलों को खनिज बहुल क्षेत्र घोषित किया गया जो निम्न प्रकार है- इलाहाबाद, झांसी, सहारनपुर, मिर्जापुर, ललितपुर, जालौन, महोबा, सोनभद्र, चित्रकूट, चंदौली, बांदा, हमीरपुर आदि।

हाल ही में सोनभद्र में चाइनाक्ले का विशाल एवं सिलिमिनाईट का लघु भंडार मिला है। सोनभद्र में सोना व कोयले की खोज प्रगति पर है। झांसी में एसबेस्टस की खोज प्रगति पर है।  बांदा में हीरे की खोज व ललितपुर में प्लेटिनम वर्ग के धातु की खोज प्रगति पर है।

प्रमुख खनिज

चुना पत्थर- मिर्जापुर जिले के गुरुमां, कनाच, बाबूहारी व रोहतास क्षेत्रों में तथा सोनभद्र के कजराहट क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में चूना पत्थर उपलब्ध है। चूना पत्थर के संचित राशि की दृष्टि से प्रदेश का देश में दूसरा स्थान है।

कोयला- उत्तर प्रदेश कोयले के भंडार की दृष्टि से देश में आठवां स्थान रखता है। यहां सोनभद्र के गोंडवाना पत्थरों में कोयला पाया जाता है। सोनभद्र के सिंगरौली क्षेत्र से प्राप्त कोयले का उपयोग ओबरा ताप विद्युत गृह और सिंगरौली संयंत्र में किया जाता है।

बॉक्साइट- बॉक्साइट बांदा, चंदौली व ललितपुर जनपदों में पाया जाता है।

डोलोमाइट- प्रदेश में उच्च स्तर का डोलोमाइट सोनभद्र में कजराहट क्षेत्र से प्राप्त होता है। बांदा जिले में भी डोलोमाइट पाया जाता है। यह पोर्टलैंड सीमेंट, प्लास्टर ऑफ पेरिस तथा गंधक के तेजाब के निर्माण में भी प्रयुक्त होती है।

कांच बालू- कांच बालू के उत्पादन की दृष्टि से उत्तर प्रदेश का आंध्र प्रदेश के बाद द्वितीय स्थान है। प्रदेश में गंगा तथा यमुना नदी से कांच बनाने योग्य सिलिका बालू प्राप्त किया जाता है। भूगर्भवेत्तो के अनुसार प्रदेश में कांच बालू का सुरक्षित भंडार 10 करोड़ टन से भी अधिक है।

पोटाश लवण- यह खनिज प्रदेश के इलाहाबाद, चंदौली, झांसी तथा बांदा जिले से प्राप्त किया जाता है।

टाल्क या सेलखड़ी- प्रदेश के हमीरपुर और झांसी जिलों में सेलखड़ी खनिज के भंडार है।

पाइराइट्स- यह खनिज प्रदेश के मिर्जापुर व सोनभद्र जिले में पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।

चायनाक्ले- प्रदेश के सोनभद्र व बांदा जिले में चाइनाक्ले पाया जाता है।

हीरा- प्रदेश में हीरा कुछ मात्रा में बांदा में मिलता है। मिर्जापुर के जंगल में भी कुछ हीरे मिले है। नवीन खोजों के अनुसार बांदा के सीमावर्ती क्षेत्र कालिंजर में हीरे के व्यापक भंडार होने की संभावना है।

सोना- प्रदेश में कुछ मात्रा में सोना शारदा और रामगंगा नदियों के रेतो में पाया जाता है। नवीन खोजो के अनुसार ललितपुर जिले के भीकमपुर क्षेत्र तथा सोनभद्र के हरदी क्षेत्र में स्वर्ण खनिज होने की संभावना है।

तांबा- प्रदेश के ललितपुर जिले का सोनराई क्षेत्र तांबा उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र है। तांबा मुख्यतः आग्नेय एवं परतदार चट्टानों में नसों के रूप में मिलता है।

यूरेनियम- प्रदेश के ललितपुर जिले में यूरेनियम के सीमित भंडारों की खोज की गई है।

संगमरमर- संगमरमर एवं अन्य इमारती पत्थर मिर्जापुर एवं सोनभद्र जिलों में पाए जाते हैं।

एस्बेस्टस- प्रदेश के मिर्जापुर व बड़ागांव क्षेत्र झांसी में एजबेस्टस पाया जाता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से सीमेंट निर्माण तथा विद्युत उपकरणों में किया जाता है।

जिप्सम- जिप्सम राज्य के झांसी तथा हमीरपुर जिले में पाया जाता है। इसका उपयोग सीमेंट, गंधक तथा अमोनियम सल्फेट नामक रासायनिक पदार्थ के निर्माण में किया जाता है।

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चिराग बालियान मुज़फ्फरनगर

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