Vedic Civilization

( वैदिक सभ्यता- सामाजिक और धार्मिक जीवन )

सामाजिक जीवन ( Social Life )

सामाजिक संगठन का आधार गोत्र या जन्ममूलक समबन्ध था। परिवार समाज की आधार भूत ईकाई थी परिवार का प्रधान को कुलप या ग्रहपति कहा जाता था आर्य समाज पितृसत्तात्मक था,परन्तु नारी को मातृरूप मे पर्याप्त सम्मान प्राप्त था।

पुत्र ही पैतृक सम्पत्ति का उतराधिकारी होता था इसमे पुत्री को कोई अधिकार नही था पत्नी अपने पति के साथ धार्मिक अनुष्ठानों मे प्रमुख रुप से भाग लेती थी। ऋग्वैदिक काल मे संयुक्त परिवार की प्रथा थी। परिवार की सम्पन्नता का मापदंड परिवार की ‘वृहदता’ थी। ऋग्वैदिक काल मे वर्ण व्यवस्था के चिन्ह दिखाई देते हैं,

धार्मिक जीवन ( Religious Life )

उतर वैदिक काल मे उतरी दो-आब ब्राह्मणो के प्रभाव मे आर्य संस्कृति का केन्द्र स्थल बन गया। यज्ञ इस संस्कृति का मूल था ओर यज्ञ के साथ-साथ अनेकानेक अनुष्ठान ओर मंत्र विधियां प्रचलित हुई। ऋग्वैदिक काल के दो प्रमुख देवता इन्द्र ओर अग्नि का अब पहले जैसा महत्व नहीं रहा।

उनके स्थान पर उतर वैदिक काल मे प्रजापति जो देवकुल मे सृष्टि के निर्माता थे को सर्वोच्च स्थान प्राप्त हो गया। पशुओं के देवता रुद्र इस काल मे ऐक महत्वपूर्ण देवता बन गये उतर वैदिक काल मे इनकी पूजा शिव के रूप मे होने लगी।

विष्णु को सर्व संरक्षक के रूप मे पूजा जाता था उतर वैदिक काल मे मूर्ति पूजा के आरंभ होने का कुछ आभास मिलने लगता हैं

 

Quiz 

Question – 36

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Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

प्रभुदयाल मूण्ड चूरु, लालशंकर पटेल डूंगरपुर, पुष्पेंद्र कुलदीप झुंझुनू, धर्मवीर शर्मा अलवर 

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