( पाश्यात्य समझौता वादी विचारक तुलनात्मक अध्ययन -जीन जैक्स रूसो )

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रूसो का जन्म 28 जून 1712 ईसवी को जाने वाले हुआ था। रूसो का जन्म जेनेवा में हुआ रूसो पहले ऐसे राजनीतिक दार्शनिक वह है जो लॉक से प्रभावित होकर संविदा साद्बांत के आथार पर पूणंतया लोकप्रिय संप्रभुता के विचार और सामान्य इच्छा की धारणा का प्रतिपादन किया था ।

फ्रांस की डिगान अकादमी ने एक निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया जिसका प्रमुख विषय था विज्ञान और कला की प्रकृति से नैतिकता परिष्कृत हुई वह विकरक्त हुई।

रूसो ने राजनीति विज्ञान में पहली बार समानता की संकल्पना का प्रतिपादन किया

सेबाइन :- रूसों ने आधुनिक युग में पहली बार “समुदाय” को मान्यता को पुनर्जीवित कर दिया

रूसों स्पाँर्टा के समुदाय से प्रभावित था। रूसों प्रथम बार “राष्ट्वाद की संकल्पना” सैद्बातिक आधार रखा। रूसो ने नागरिक धर्म की संकल्पना दी।रूसों का  प्रसिद्ध कथन बुद्धिमान व्यक्ति पतित प्राणी है।

वेपर :- रूसों तर्क का उत्साही था।

रूसों :- व्यक्ति.को भद्र पशु की संज्ञा दी।

मैक्सी :- रूसों को प्रकृति का शिशु कहा है ।

लाँक की भाँति रूसों भी सरकार को” मजिस्टे्ट ” की संज्ञा दी। रूसो की विचारों लोकप्रिय संप्रभुता का विचार पाया जाता है। रूसो ने राज्य की संप्रभुता के लिए सामान्य इच्छा शब्द का प्रयोग किया ।

हर्नशा :- लेवियाथन का कटा सिर ही रूसो की सामान्य इच्छा है

रूसो महिलाओं के लिए समान शिक्षा के अधिकार का समर्थन नहीं किया  रूसो को फासीवाद के विचार का दार्शनिक पिता कहा जाता है

सेबाइन के अनुसार रूसो की स्वतंत्रता की संकल्पना को विरोधाभासी स्वतंत्रता कहा जाता है ।

✍टाँलमैन :- रूसों आधुनिक सर्वाधिकार वादी विचारधारा का दार्शनिक प्रणेता है

रूसो की प्रमुख रचनाएं:-

  • कलाओ और विज्ञानों के नैतिक प्रभाव पर एक निबंध 1750
  • कला व विज्ञान पर निबंध 1750
  • व्यक्तियों के बीच असमानता के उद्भव एवं आधार पर निबंध 1755
  • राजनीति अर्थशास्त्र का परिचय 1758
  • सामाजिक समझौता 1762
  • दी इमांइल 1762
  • आत्मआलोचना 1789
  • संवाद
  • पोलैंड और कोरसीना का आदर्श संविधान

जीन जेक्स रूसो महत्वपूर्ण कथन

  • “जो धर्म दूसरे धर्मों के प्रति सहनशील हो उनके साथ सहनशीलता का व्यवहार तब तक करना चाहिए जब तक उनके सिद्धांत नागरिक कर्तव्यों के विपरीत न हो जाए !”
  • “स्वतंत्रता को छोड़ना मनुष्य का छोड़ना है, मनुष्यता के अधिकारों और कर्तव्यों को दे देना है !””सामान्य इच्छा के लिए मतदाताओं की संख्या की अपेक्षा सार्वजनिक हित अधिक जरूरी है !”
  • “बल शारीरिक है उसके सामने झुक जाना मजबूरी की बात है इच्छा कि नहीं,,अधिक से अधिक वह होशियारी का काम है !”
  • “पागलों की दुनिया में स्वस्थ दिमाग का होना भी एक प्रकार का पागलपन है !”
  • “मनुष्य स्वतंत्र पैदा हुआ है लेकिन वह सर्वत्र बेड़ियों से जकड़ा हुआ है !”

 

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सुभिता मील, नेमीचंद चावला घाड़ (टोंक), मुकेश पारीक ओसियाँ, नवीन कुमार, हरेन्द्र सिंह जी

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