( पाश्यात्य राजनीतिक विचारक-जॉन स्टुअर्ट मिल )

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अंग्रेज विचारक जॉन स्टुअर्ट मिल (1806 – 1873) को व्यक्तिवाद तथा स्वतंत्रता का मसीहा माना जाता है। मिल उदारवादी भी थे। मिल ने बेंथम के उपयोगितावाद में संशोधन करते हुए “सुखों की मात्रा” के साथ उसके “गुणों” पर भी व्यापक बल दिया।

उपयोगितावाद पर विचार –

मिल प्रमुख उपयोगितावादी थे। बेंथम के उपयोगितावाद में उन्होंने व्यापक संशोधन प्रस्तुत किए। बेंथम ने उपयोगितावाद पर गुणात्मक अंतर को अनदेखा कर दिया था जबकि मिल के अनुसार सुखों की मात्रा के साथ-साथ गुणवत्ता भी होना आवश्यक है। मनुष्य भौतिक सुखों की भोगवृति के लिए नहीं जीता है बल्कि उसे बौद्धिक, नैतिक तथा साहित्य का अभीरुचियों से भी आनंद (सुख) प्राप्त होता है।

“एक संतुष्ट मूर्ख की अपेक्षा है संतुष्ट सुकरात होना कहीं ज्यादा अच्छा है।” – मिल

“जिसने भी एक बार स्वतंत्रता का स्वाद ले लिया वह उसे किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहता।” – मिल

” उपयोगितावादी मानदंड व्यक्ति का अधिकतम सुख ने होकर अधिकतम सामूहिक सुख है”।

स्वतंत्रता संबंधी विचार –

मिल ने मनुष्य के व्यक्तित्व विकास हेतु स्वतंत्रता को अनिवार्य बताया है। उसने स्वतंत्रता के 2 प्रकार गिनाए हैं – 1. स्वविषयक 2. पर विषयक। स्वविषय स्वतंत्रता का संबंध कर्ता के जीवन से है अन्य किसी पर उसका प्रभाव नहीं पड़ता। परविषयक स्वतंत्रता का समाज पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। मिल का तर्क है कि राज्य द्वारा व्यक्ति के स्वविषयक कार्यों में हस्तक्षेप नहीं किया जाए। पर विषयक कार्यों पर बंधन लगाया जा सकता है। यदि ऐसा कार्य दूसरों को हानि पहुंचाता हो तो। कभी-कभी राज्य द्वारा लोकहित में स्वविषयक कार्यो पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है। मिलने स्वतंत्रता के कई प्रकार बताए हैं।-

  • 1. अंतर आत्मा की स्वतंत्रता
  • 2. अभिरुचि की स्वतंत्रता
  • 3. संघ या संगठन बनाने की स्वतंत्रता

प्रतिनिधि शासन की अवधारणा पर विचार –

मिल “बहुमत के शासन” के स्थान पर “प्रतिनिधि शासन” का समर्थन करते हैं। मिल ने स्त्री मताधिकार का समर्थन किया था। अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा हेतु उन्होंने “आनुपातिक प्रतिनिधित्व तथा बहुल मतदान” का समर्थन किया। मिल ने खुले मतदान का भी समर्थन किया।

कल्याणकारी राज्य की अवधारणा पर विचार –

मिलने राजनीतिक क्षेत्र में संवैधानिक तथा प्रतिनिधि शासन की बात कही वहीं आर्थिक क्षेत्र में कल्याणकारी राज्य का समर्थन किया। मिल ने संपति कर का प्रस्ताव रखते हुए श्रमिक कल्याण की बात कही। उसने भूमि संपदा को राज्य द्वारा नियंत्रित करने का समर्थन किया।

मिल पहले उदारवादी थे जिन्होंने व्यक्ति तथा राज्यों के संबंधों को निर्धारित करते हुए व्यक्ति की स्वतंत्रता में वृद्धि हेतु राज्य के हस्तक्षेप को उचित बताया। मिल ने राज्य के सकरात्मक कार्यों पर बल दिया। उन्होंने अनिवार्य शिक्षा, बाल श्रम, बंधुआ श्रम से मुक्ति, भू संपदा कर, एकाधिकार पर नियंत्रण तथा काम के घंटे तय करने के लिए राज्य को हस्तक्षेप का सुझाव दिया।

स्त्री स्वतंत्रता पर विचार –

मिल ने पुरुष तथा स्त्री को समान महत्व दिया। वे इस बात से खिन्न थे कि आधी आबादी (स्त्रियां), पुरुषों के नियंत्रण में रहे।

प्रमुख रचनाएं –

  • ऑन लिबर्टी (On liberty) 1859 – स्वतंत्रता संबंधी विचार प्रकट किए।
  • प्रिंसिपल्स ऑफ पॉलिटिकल इकनॉमी (Principles of political economy)1848 – आर्थिक व कल्याणकारी राज्य संबंधी विचार।
  • उपयोगितावाद(Utilitarianism) – उपयोगितावाद संबंधी विचार

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पूनम छिंपा हनुमानगढ़, मुकेश पारीक ओसियाँ, रवि जी जोधपुर, हरेन्द्रसिंह जी

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