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Western Political Thinker-Karl Marx ( कार्लमार्क्स )

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जर्मन दार्शनिक कार्ल मार्क्स को “वैज्ञानिक समाजवाद का जनक” कहा जाता है। उनका जन्म जर्मनी के प्रशा राज्य में 1818 ईस्वी में हुआ। उनकी शिक्षा बोन तथा बर्लिन विश्वविद्यालय में हुई। मार्क्स हीगल के “द्वंद्ववाद” से बहुत प्रभावित थे। उन्होंने फायरबाख के “भौतिकवाद” से काफी सीखा। इन दोनों के दर्शन को समेकित करते हुए मार्क्स “द्वंदात्मक भौतिकवाद” का सिद्धांत दिया जिसने इतिहास की व्याख्या में सहायता की।

द्वंदात्मक भौतिकवाद –

दर्शनशास्त्र के तत्व मीमांसको ने सृष्टि का सार तत्व “चेतना” को बताया है। अध्यात्म ने “प्रत्यय चेतना तथा आत्मा” को प्रकृति का गतिमान घटक बताया है जबकि मार्क्स ने भौतिकवाद या जड़वाद के अनुसार “पदार्थ” को सृष्टि का गतिमान तत्व बताया है। प्राचीन यूनानी चिंतन में सर्वप्रथम डेमोक्रेट्स तथा एपीक्यूरस जैसे विद्वानों ने भौतिकवाद के दर्शन पर विचार रखे थे।

उन्होंने प्राकृतिक घटनाओं के संचरण हेतु परमाणु या पदार्थ को उत्तरदाई बताया था। आधुनिक भौतिकवाद के अनुसार चेतना या आत्मा ही घटनाओं के परिवर्तन हेतु जिम्मेदार नहीं है बल्कि सजीव तथा मूर्त रूप से पदार्थ ही सृष्टि में परिवर्तन का सूचक है। होब्स ने यांत्रिक भौतिकवाद की अवधारणा को लेवियाथन1651 में स्पष्ट करते हुए कहा कि सभी सामाजिक संस्थाएं यंत्र है जिनको मनुष्य ने ही बनाया है।

मार्क्स ने यांत्रिक परिवर्तन से मत विभिन्नता रखते हुए बताया कि जड़ तत्व में ही ऐसे तत्वों का अस्तित्व रहता है जो परस्पर संघर्ष तनाव तथा अंतर्विरोध को प्रेरित करता है यहां उसने हीगल के द्वंद्वात्मक आश्रय ग्रहण किया है । हीगल ने द्वंदात्मक के अंतर्गत परस्पर विपरीत विचारों के टकराव से सत्य की रहस्योद्घाटन का प्रयास किया है।

हीगल ने चेतना को सृष्टि का मूल तत्व माना है। हीगल ने वाद प्रतिवाद संवाद पर बल दिया है और यह प्रक्रिया तीनों में तब तक चलती है जब तक परम सत्य की प्राप्ति नहीं हो जाए। मार्क्स ने हीगल की चेतना को ना मानकर जड़ तत्वों को सामाजिक परिवर्तन हेतु संचालक बताया है।

  • “इतिहास की प्रत्येक अवस्था में उसके विनाश के बीज निहित होते हैं।” – कार्ल मार्क्स
  • “पूंजीवाद के पतन के बीज पूंजीवाद में निहित है।” – कार्ल मार्क्स
  • मार्क्स के अनुसार “पूंजीवाद वाद है, सर्वहारा का अधिनायकवाद प्रतिवाद है तथा साम्यवादी व्यवस्था संवाद है।” उत्पादन प्रणाली के अंतर्गत वर्ग संघर्ष भी जड़ तत्वों के अंतर्विरोध का परिणाम है – कार्ल मार्क्स

कार्ल मार्क्स महत्वपूर्ण कथन

  • ✍ “हीगल ने द्वंद्ववाद को सर के बल खड़ा कर रखा है,, उसे सीधा खड़ा किया जाना जरूरी है !!”
  • ✍ “मनुष्य धर्म को बनाता है, धर्म मनुष्य को नहीं !!”
  • ✍”धर्म जनता के लिए अफीम हैं !!”
  • ✍ “मेरी समझ में विचार भौतिक जगत का मनुष्य के दिमाग में प्रतिबिंब है जिसे चिंतन की शैलियों में अनुदित कर लिया जाता है !!”
  • ✍ “अतिरिक्त मूल्य को पाने के लिए काम में लाए गए उत्पादन के सभी निजी स्वामित्व के साधनों का योग पूँजी है” !!
  • ✍ “पूंजीवादी उत्पादन, प्रकृति के अजय नियम के अनुसार स्वयं ही अपने विनाश का कारण बनता है !!”
  • ✍”अब तक के सभी समाजों का इतिहास वर्ग संघर्ष का इतिहास है !”
  • ✍ “साम्यवादी अपने विचारों व लक्ष्य को छुपाने से घृणा करते हैं, वह खुलेआम घोषणा करते हैं, कि वर्तमान सामाजिक ढांचे को बलात् हटाकर ही उनके लक्ष्य पूरे हो सकते हैं शासक वर्ग साम्यवादी क्रांति से कांपता है,तो कांपे पर सर्वहारा वर्ग को अपने जंजीर के अलावा कुछ नहीं खोना है, और पाना है सारा संसार,-दुनिया भर के मजदूरों एक हो जाओ “

ऐतिहासिक भौतिकवाद पर विचार –

ऐतिहासिक भौतिकवाद, द्वंदात्मक भौतिकवाद का पूरक है। इसे “इतिहास की आर्थिक व्याख्या”, “आर्थिक नियतिवाद” तथा “इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या” के नाम से भी जाना जाता है। उसने उत्पादन प्रणाली के दो घटक बताए हैं –

  1. उत्पादन शक्तियां,
  2. उत्पादन संबंध।

The critique of political economy 1859 नामक पुस्तक में मार्क्स ने ऐतिहासिक भौतिकवाद पर विचार व्यक्त किए हैं।

एशियाई उत्पादन प्रणाली –

मार्क्स तथा एंगेल्स ने 1853 में लिखे पत्र में लिखा की निजी संपत्ति के अभाव में एशियाई समाज प्रायः गतिहीन हो रहा है। मार्क्स तथा एंगेल्स ने भारतीय जाति व्यवस्था के वर्ग संबंधों को “आदिम रूप” बताया है। उन्होंने न्यूयॉर्क डेली ट्रिब्यून को प्रेषित लेख में भारत में ब्रिटिश शासन को आधुनिकीकरण का पर्याय बताया है।

वर्ग संघर्ष पर विचार –

मार्क्स के अनुसार “अब तक के सभी समाजों का इतिहास वर्ग संघर्ष का इतिहास रहा है।” स्वामी तथा दास, कुलीन तथा सामान्य, जमीदार तथा कृषक एवं पूंजीपति तथा कामगार परस्पर विरोधी हितों के लिए संघर्ष करते रहे हैं। उनके अनुसार यह संघर्ष तभी समाप्त होगा जब श्रमिक अथवा सर्वहारा वर्ग पूंजीपतियों को बेदखल कर देंगे।

“सर्वहारा का अधिनायकवाद” स्थापित हो जाने पर उत्पादन के समस्त साधन व संपूर्ण प्रणाली पर उनका स्वामित्व हो जाएगा। इस स्थिति में न तो वर्ग होंगे ना ही शोषण। यही साम्यवाद है। जिससे राज्य भी विलुप्त हो जाएगा चारों ओर व्यक्ति स्वतंत्रता के दर्शन होंगे।

कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो ( साम्यवादी घोषणापत्र 1848 ) की अंतिम वाक्यों में मार्क्स ने आह्वान किया है कि – मैं खुलेआम घोषणा करता हूं कि वर्तमान सामाजिक संरचना पूंजीवाद को जबरन हटाकर साम्यवादी क्रांति करनी होगी। सर्वहारा को अपनी जंजीरों के अलावा कुछ नहीं खोना है, पाने के लिए सारा संसार है। दुनिया के मजदूरों ! एक हो जाओ।”

अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत पर विचार –

मार्क से वस्तुओं के मूल्य का निर्धारण उस में लगाए गए व्यक्तियों के श्रम के आधार पर करता है। कभी कभी काम के नियत घंटों से भी ज्यादा का मजदूरों से काम लिया जाता है अर्थात मजदूर द्वारा अतिरिक्त श्रम बेचा जाता है। अतिरिक्त कमाई पूंजीपति निगल जाते हैं उन्होंने इस अतिरिक्त मूल्य को बेईमानी की कमाई कहकर आलोचना की है।

परायेपन का सिद्धांत –

परायापन या अलगाव संबंधी सिद्धांत पर उनके विचार उनकी कृति “इकनोमिक एंड फिलोसोफिकल में मैन्युस्क्रिप्ट ऑफ़ 1844” में हैं। इसमें उन्होंने पूंजीवाद की प्रखर आलोचना की है तथा साम्यवाद का समर्थन किया है क्योंकि पूंजीवाद व्यवस्था के कारण मनुष्य में आतम बोध या आत्मज्ञान ज्ञान समाप्त हो जाता है ।

उसका जीवन भी यंत्रवत हो जाता है। प्रकृति से, अपने उत्पादन से, अपने परिवार समाज से,यहां तक कि अपने आप से भी वह पराया हो जाता है। अतः उसके अपनापन, आत्म बोध हेतु पूंजीवाद का समाप्त किया जाना जरूरी है।

मार्क्स का राज्य सिद्धांत –

मार्क्स राज्य को वर्ग शोषण का यंत्र मानता है । यह पूंजीवाद को बनाए रखने का बहाना है। “साम्यवादी घोषणापत्र” में राज्य को “पूंजी पतियों की कार्यकारी समिति” कहा है। एंगल्स के अनुसार – “राज्य एक वर्ग के द्वारा दूसरे वर्ग के शोषण का यंत्र है।” मार्क्स कहता है की क्रांति के द्वारा पूंजीवाद का अंत करके सर्वहारा का अधिनायकवाद स्थापित किया जाएगा।

वर्ग विहीन समाज की स्थापना में समय अवश्य लगेगा परंतु तब तक संक्रमण काल में सर्वहारा का शासन होगा। सर्वहारा वर्ग राज्य की शक्तियों का प्रयोग पूंजीवाद के समूल समाप्ति के साधन के रुप में करेगा। साम्यवाद की स्थापना के बाद वर्ग भी समाप्त हो जाएंगे तथा राज्य भी बिखर जाएगा।

साम्यवादियों के अनुसार धर्म एक अफीम है।”

मार्च ने सर्वप्रथम 1877 ई.में रूसी शिष्यों से पत्र व्यवहार में पूंजीवाद की स्थापना की बात कही थी।

 

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No of Questions-48

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प्रश्र=1. मार्क्स ने अपने विचारों को जनता तक पहुंचाने के लिए किस समाचार पत्र में लिखना प्रारंभ किया ?

Correct! Wrong!

प्रश्र=2. साम्यवाद की बाइबिल कहलाती हैं ?

Correct! Wrong!

प्रश्र=3. मार्क्स ने भौतिकवाद किससे ग्रहण किया था ?

Correct! Wrong!

प्रश्र=4. निम्नलिखित में से एक काल्पनिक समाजवादी नहीं है ?

Correct! Wrong!

प्रश्र=5. किसने लिखा है कि "आधुनिक पूंजीवादी समाज एक ऐसे जादूगर के समान है जिसने अपने जादू के जोर से पाताल लोक की शक्तियों को भी भुला लिया है।"

Correct! Wrong!

प्रश्र=6. निम्नलिखित में से किसने कहा है कि- "कार्ल मार्क्स ने न केवल विश्व की एक नवीनतम क्रांतिकारी विचारधारा प्रदान की वरन् उसने विश्व के इतिहास की दिशा ही बदल दी।"

Correct! Wrong!

प्रश्र=7. कार्ल मार्क्स ने समाज की प्रकृति के कितने अंग बताए हैं ?

Correct! Wrong!

प्रश्र=8. द्वंद्वात्मक पद्धति का विकास किसकी मस्तिष्क की कल्पना मात्र है ?

Correct! Wrong!

प्रश्र=9. उत्पादन के आधार पर कार्ल मार्क्स ने समाज को कितने भागों में विभाजित किया था ?

Correct! Wrong!

प्रश्र=10. किसके अनुसार- "पूंजीवाद अपनी कब्र स्वयं खोदता है।"

Correct! Wrong!

प्रश्र=11. किसने कहा कि-"कार्ल मार्क्स के चिंतन में वर्ग संघर्ष की धारणा का विशेष महत्व है।"

Correct! Wrong!

प्रश्र=12. कार्ल मार्क्स ने किस पुस्तक में 'अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत' का प्रतिपादन किया था ?

Correct! Wrong!

प्रश्र=13. कार्ल मार्क्स किसके समान मानता है कि श्रम ही मूल्य का स्त्रौत है ?

Correct! Wrong!

प्रश्र=14. किसने कहा है कि- "जिस प्रकार फूल सूख कर झड़ जाता है उस प्रकार राज्य रूपी वृक्ष मुरझाकर स्वयं ही समाप्त हो जाता है।"

Correct! Wrong!

प्रश्र=15. किसने कहा है कि- "कार्लमार्क्स ने साम्यवाद को केवल वैज्ञानिक आधार ही प्रदान नहीं किया वरन् उसे विशाल शक्ति भी प्रदान की।"

Correct! Wrong!

प्रश्न=16. किस पुस्तक में कार्ल मार्क्स ने लिखा है 'दार्शनिकों ने विभिन्न तरीकों से दुनिया की व्याख्या की है जबकि सवाल इसे बदलने का है।'

Correct! Wrong!

प्रश्न=17. कार्लमार्क्स की रचना 'दास कैपिटल' किस भाषा में लिखी गई है ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=18. 'जर्मन आइडियोलॉजी' किसकी पुस्तक है ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=19. 'द कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो' को साम्यवादियों की बाईबिल माना जाता है, इसकी रचना किसने की ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=20. किस पुस्तक में मजदूरों को क्रांति के लिए ललकारते हुए यह नारा दिया गया कि- "दुनिया के मजदूरों एक हो जाओ तुम्हारे पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है तथा पानी के लिए पूरा संसार विद्यमान है।"

Correct! Wrong!

प्रश्न=21. कार्लमार्क्स ने 'द्वंदवाद' किस विचारक से ग्रहण किया ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=22. मार्क्स ने अपनी किस पुस्तक में 'अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत' का प्रतिपादन किया ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=23. मार्क्स के अनुसार पूंजीवादी शासन में मजदूरों को विसबन्धन (अलगाव) हो जाता है-

Correct! Wrong!

प्रश्न=24. मार्क्स पूंजीवाद की प्रशंसा करता है क्यूंकि-

Correct! Wrong!

प्रश्न=25. मार्क्स ने निम्न में से किस दार्शनिक के द्वन्दात्मक सिद्धान्त को सीधा खड़ा करने का दावा किया-

Correct! Wrong!

प्रश्न=26. मार्क्स के मतानुसार-

Correct! Wrong!

प्रश्न=27. "उदारवाद की अवैध तथा विद्रोही संतान मार्क्सवाद को बताया है" किस विचारक का कथन है ?

Please select 2 correct answers

Correct! Wrong!

प्रश्न=28. "राज्य मुरझा जायेगा और अजायबघर में उसी तरह चला जाएगा जिस प्रकार पीतल की कुल्हाड़ी और पहिया चले गए" यह कथन कौन सी विचारधारा का है ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=29. द्वंद्वात्मक भौतिकवाद का पूरक सिद्धांत कौन सा है ?

Correct! Wrong!

प्रश्न=30. मार्क्सवाद में आधार से अधिरचना की ओर परिवर्तन को किस की संज्ञा दी जाती है ?

Correct! Wrong!

प्रश्र.31) "एशियाई समाज गतिशील है"- यह कथन है ?

Correct! Wrong!

प्रश्र.32) मनुष्य के द्वारा ईश्वर का निर्माण होता है ?

Correct! Wrong!

प्रश्र.33) मार्क्स ने वर्ग संघर्ष का विचार किससे ग्रहण किया था ?

Correct! Wrong!

प्रश्र 34) मार्क्स ने संगठित श्रम कहा है ?

Correct! Wrong!

प्रश्र 35) मार्क्स ने विचारधारा को कहा है ?

Correct! Wrong!

प्रश्र.36) किसने कहा कि- "हंसिया एवं हथौड़े की भांति राज्य अजायबघर में चला जाएगा ?"

Correct! Wrong!

प्रश्र.37) किसने कहा है कि-'सर्वहारा वर्ग के अधिनायकत्व का राज्य विलुप्त हो जाएगा ?'

Correct! Wrong!

प्रश्न.38. मार्क्सवाद के मुख्य रूप से कितने रूप हैं

Correct! Wrong!

प्रश्न.39. मार्क्सवाद का उदय किस सदी में हुआ ?

Correct! Wrong!

प्रश्न.40. किस विचारधारा के उदय पूंजीवाद के विरोध स्वरूप तथा उपयोगितावाद के परिणाम स्वरुप हुआ ?

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प्रश्न.41. मार्क्सवादी विचारक है-

Correct! Wrong!

प्रश्न42. समाजवाद का नाम सबसे पहले किसने दिया ?

Correct! Wrong!

प्रश्न.43. समाजवाद के मुख्य रूप से कितने प्रकार का होता है

Correct! Wrong!

प्रश्न.44. फैबियन समाजवाद का समर्थक नहीं है-

Correct! Wrong!

प्रश्न-45. लोकतांत्रिक समाजवाद के समर्थक नहीं है-

Correct! Wrong!

प्रश्न.46. कार्ल मार्क्स ने किस पुस्तक में कहा कि- 'दुनिया के मजदूरों एक हो जाओ'

Correct! Wrong!

प्रश्न.47. मार्क्स के अनुसार "साम्यवादी समाज मे अंतर्विरोध नही पाया जाता इसलिए वहां क्रांति की संभावना नहीं होगी" मार्क्स का यह नियम कहलाता है-

Correct! Wrong!

प्रश्न.48. प्राकृतिक अधिकारों की आलोचना करते हुए मार्क्स उन्हें कहता है

Correct! Wrong!

Western Political Thinker-Karl Marx Quiz ( कार्लमार्क्स )
VERY BAD! You got Few answers correct! need hard work.
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GOOD! You well tried but got some wrong! need more preparation
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पूनम छिंपा हनुमानगढ़, नेमीचंद जी चावला टोंक, मुकेश पारीक ओसियाँ, सुभिता जी मील जयपुर, गोविंद प्रसाद जी गुर्जर कोटा

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