Image result for मैकियावेलीमैक्यावली का जन्म इटली के फ्लोरेंस शहर में सन 1469 ईस्वी में हुआ था। मैक्यावली को “पुनर्जागरण का शिशु “कहा जाता है।

मैक्यावली को आधुनिक राजनीतिक विज्ञान का जनक कहा जाता है वह पहला विचारक था जिसने राजनीति को नैतिकता और धर्म से पृथक कर धर्मनिरपेक्ष विचारों को जन्म दिया मैक्यावली ने ही सर्वप्रथम राज्य शब्द राज्य शब्द का प्रयोग किया था

केटलिन ने मैक्यावली को प्रथम राजनीतिक वैज्ञानिक कहा

मैक्यावली की अध्ययन पद्धतियां

ऐतिहासिक, वैज्ञानिक, तुलनात्मक ,यथार्थवादी, आगमनात्मक ,पर्यवेक्षणात्मक

मैकियावेली ने मध्ययुगीन चिंतन को इनकार कर के वैज्ञानिक चिंतन का सर्वप्रथम प्रयास किया। उसने अपने चिंतन में ऐतिहासिक पद्धति का प्रयोग किया है।

लोग अपने पिता की मृत्यु को जल्दी ही भूल जाते हैं लेकिन पैतृक संपत्ति की हानि को कदापि नहीं – मैक्यावली।

मैक्यावली की प्रमुख रचनाएं

  1. द आर्ट ऑफ वार 1521= युद्ध कला पर लिखी उत्कृष्ट रचना
  2. द हिस्ट्री ऑफ फ्लोरेंस 1532= इटली के अतीत वह वर्तमान इतिहास का वर्णन
  3. द डिस्को वर्सेस 1530= गणतंत्रात्मक सरकार का पक्ष व्यवहारिक राजनीति से संबंधित
  4. द प्रिंस 1532= सबसे प्रसिद्ध रचना राज्य कला सिद्धांत का पूर्ण विवरण मिलता है

द प्रिंस, डिस्कोर्सेज ऑन लेवी। प्रिंस की रचना लोरेंजो द मेदीची को संबोधित करते हुए की गई है। दिसकोर्सेज ऑन लेवी में मैकियावेली ने लिखा है कि सच्चरित्र लोगों के देश में “गणतंत्र “तथा स्वार्थी कपटी लोगों के देश में “राजतंत्र “उत्तम शासन प्रणाली होती है।

मैक्यावली की रचना “द प्रिंस “1513 ई. में लिखी गई थी परंतु उसका प्रकाशन मैक्यावली की मृत्यु (1527 ईस्वी )के बाद 1532 ईस्वी में हुआ।

राजनीतिक चिंतन में आधुनिक युग का श्री गणेश मैक्यावली ने किया मैक्सी ने मैक्यावली को प्रथम आधुनिक राजनीतिक चिंतक माना जोन्स मैक्यावली को आधुनिक राजनीतिक चिंतन के पिता की संज्ञा दी

राजा को लोमड़ी जैसा चालाक तथा शेर जैसा साहसी होना चाहिए – मैक्यावली।

डनिंग के अनुसार “मैक्यावली अधार्मिक तथा अनैतिक नहीं है वरन वह धर्म और नैतिकता से तटस्थ है।”

मैक्यावली निरंकुश सत्ता का समर्थक है अतः उसे “शैतान का शिष्य” तथा “तानाशाहों का गुरु” कहा जाता है। हिटलर तथा मुसोलिनी पर “प्रिंस “का व्यापक प्रभाव पड़ा।

डिस्कोर्सेज ऑन लेवी में गणतंत्रीय शासन पर तथा द प्रिंस में पूर्ण राजतंत्र पर बल दिया है। मैकियावेली धर्म व राजनीति के पृथक्करण पर बल देता है। नैतिकता के बंधन उसके प्रिंस पर लागू नहीं होते। उसके साधन पवित्र अपवित्र कैसे भी हो सकते हैं।

मैक्यावली प्रथम विचारक है जिसने शक्ति को राज्य का प्राण तत्व बनाया तथा प्राचीन धर्म तथा तत्व मीमांसा को सर्वथा अस्वीकार किया। इसने मानव व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन प्रस्तुत किया। इसलिए डब्लू.टी.ब्लूम ने मैक्यावली को “आधुनिक व्यवहारवाद का प्रवर्तक” माना है।

मैकियावेली धर्म एवं नैतिकता का राजनीतिक पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव का बड़ा हिमायती रहा है

मैकियावेली ईसाई धर्म के साथ-साथ पोप को इटली की एकता में सबसे बड़ा बाधक मानता था

मैक्यावली राज्य को परिवर्तनशील मानता है जिसका उत्थान एवं पतन होता है

मैक्यावली राज्योंके दो रूप बतलाता है

अ) स्वस्थ राज्य
ब) अस्वस्थ राज्य

मैकयावली के कथन

  • “धर्म और नैतिकता राज्य के नियमित तो किसी प्रकार के ही नहीं, बल्कि वे विश्वसनीय पथ-निर्देशक भी नहीं है, वह केवल उपयोगी सेवक और एजेंट है !”
  • “जालो (षड्यंत्रों) को बांटने के लिए नरेश को लोमड़ी और भेड़ियो को भयभीत देखने के लिए शेर होना चाहिए !”

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गोविंद प्रसाद गुर्जर कोटा, नवीन कुमार जी, नेमीचंद जी चावला टोंक, मुकेश पारीक ओसियाँ

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