( पाश्यात्य राजनीतिक विचारक-प्लेटों )

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प्लेटो का न्याय सामाजिक न्याय ही कहलाएगा लेकिन प्लेटो का सामाजिक न्याय वर्तमान सामाजिक न्याय से भिन्न है इसी कारण बार्कर ने प्लेटो के न्याय सिद्धांत की आलोचना करते हुए इसका एक बड़ा दोष यह बताया था कि यह सामाजिक न्याय न होकर कर्तव्य तक सीमित करने वाली भावना मात्र है यह कोई ठोस कानून भी नहीं है इसे न्याय अवधारणा से बिल्कुल अलग है

प्लेटो की रचनाएँ:-

( प्लेटो के सभी ग्रंथ ‘संवाद शैली’ में लिखे गए हैं ) :-

  1. The republic 380 b.c.
  2. The statesman
  3. The laws 360 b.c.
  4. Meno 390 b.c.
  5. The symposium 385 B.C.
  6. Phaedo 1995
  7. Socratic Dialogues
  8. Apology 390B.C.
  9. Timaeus 360B.C.
  10. Gorgias 380B.C.

प्लेटो तथा उसकी रचनाओं के बारे में विद्वानों द्वारा कहे गए कथन.. 

?”प्रथम आधुनिक साम्यवादी विचारक....” मैक्सी

?”प्लेटो दर्शन है तथा दर्शन प्लेटो हैं….” इमर्सन

?”प्लेटो की पुस्तक रिपब्लिक शिक्षा पर अब तक लिखे गए ग्रंथों में सबसे सुंदर प्रबंध है”…. रूसो

?”प्लेटो मुक्त समाज का शत्रु है” … कार्ल पाॅपर

?”प्लेटो द्वारा प्रतिपादित उच्च शिक्षा का यह सुझाव सर्वाधिक मौलिक और महत्वपूर्ण है”..… सेबाइन

?”प्लेटोवादी पुत्र होने की अपेक्षा तो निकट संबंधी होना कहीं अधिक उत्तम है”…... अरस्तू

?”यदि प्लेटो आज जीवित होते तो वे आधुनिक साम्यवादियों से भी प्रबल साम्यवादी होते हैं” ..… मैक्सी

?”दार्शनिक राजा प्लेटोवादी राज्य रचना की समस्त पद्धति का न्यायसंगत परिणाम है, वह कोई बाहर से थोपी हुई चीज नहीं”.... बार्कर

?”दार्शनिक शासक प्लेटो स्वयं है, और रिपब्लिक उसके शासक बनाए जाने का दावा है”…… कार्ल पाॅपर

_?”दर्शन का पोप”..… कैटलिन

 

Special Note- प्लेटो की न्याय व्यवस्था को आप आलोचनात्मक रूप में न देखे बल्कि एकल रूप में देखें और इसकी विशेषताओं को एकल रूप में देखें तभी हमें लगेगा कि उसके द्वारा जो विश्लेषित न्याय हैं वह संपूर्ण रूप में सामाजिक न्याय हैं ना कि इसमें किसी प्रकार का मिश्रण या उसकी अन्य रूप में कोई इकाई है आलोचनात्मक आधार पर एक हैं कि यह भी हो सकता है या वह भी हो सकता है आप किसे आलोचनात्मक पहलू में ना जाए तभी हमें न्याय सिद्धांत पूर्ण रूप में समझ में आ पाएगा

कहने का तात्पर्य यह है यदि हम आलोचनात्मक पहलुओं को देखेंगे तो फिर विभिन्न कथनों के आधार पर कर के आधार पर प्लेटो के न्याय को ना सामाजिक विज्ञान नागरिक राजनीतिक का वैधानिक मान सकते हैं फिर तो हम यह कह सकते हैं कि प्लेटो का न्याय निष्क्रिय अव्यवहारिक और अविश्वसनीय है

 

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नेमीचंद जी चावला टोंक, नवीन कुमार, मुकेश पारीक ओसियाँ, रवि जी जोधपुर

One thought on “Western Political Thinker-Plato ( प्लेटो )”

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