Western Political Thinker-Thomas Hobbes

( पाश्यात्य राजनीतिक विचारक-थॉमस हॉब्स )

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थॉमस हॉब्स (1588-1679) इंग्लैंड का प्रसिद्ध राजनीति विज्ञानी है। Thomas Hobbes गैलीलियो की गति सिद्धांत तथा हार्वे हृदय संबंधित धारणा को अपनी राजनीति दर्शन का आधार बनाया थॉमस हॉब्स ज्यामिति के नियम को भी अपने राजनीतिक घटनाओं की व्याख्या के लिए अपनाया था हॉब्स ने विज्ञान की शाखाओं ज्यामिति, भौतिकी के आधार पर शासन के सिद्धांतो को ‘कार्य-कारण’ संबंधो पर परखा।

सेबाइन के अनुसार के अनुसार थॉमस हॉब्स के दर्शन का मूल आधार ज्यामिति तथा यांत्रिकी है

✍ Thomas हाँब्स फ्रांसिस बेकन के इस विचार को स्वीकार किया है कि यांत्रिकी के नियम सामाजिक जीवन पर भी लागू होते हैं

हॉब्स ने यह सिद्धांत दिया कि यह जगत पदार्थ से निर्मित है, जिसमें गति का नियम शाश्वत है। हॉब्स ने उस नियंत्रक व्यक्ति को ‘लेवियाथन’ (तिमिंगल) की संज्ञा दी है, जो कल्पनाप्रसूत देत्याकार जलीय-जीव है।

थॉमस हॉब्स के मतानुसार सृष्टि मूल तत्व कण है समस्त ज्ञान का आधार इंद्रियों की अनुभूति को मानता है

प्रोफेसर सेबाइन ने लिखा है हाँब्स के अनुसार मानव के प्रत्येक व्यवहार के मूल तत्वों में आत्मरक्षा का मनोवैज्ञानिक सिद्धांत विद्यमान रहता है

अधिकारों के संकलन में सर्वोच्च शक्तिशाली ‘समप्रभु’ का जन्म होगा जिसे हॉब्स ने ‘लेवियाथन’ या ‘राज्य’ कहा है। लेवियाथन लोगों की रक्षा तथा सामाजिक शांति हेतु सदैव तत्पर रहता है। सामाजिक समझोता परिणाम होगा- ऐसी निरंकुश सत्ता या शक्तिशाली राज्य जो आंतरिक एवं बहारी शत्रुओ से सुरक्षा प्रदान करेगा।

समप्रभु के आदेश ही कानून होंगे तथा उसका प्रत्येक कार्य न्यायसंगत होगा। यहां व्यक्तिगत इच्छाओं को समप्रभु के हाथों में सौप दिया गया है। समप्रभु किसी की आज्ञा का पालन नहीं करेगा।

हॉब्स की इस विचारधारा में राज्य (संप्रभुता) निरंकुश है। इस समझौते के परिणामस्वरुप हॉब्स मे निरंकुश राजतंत्र की स्थापना का प्रयास किया है हॉब्स ने समप्रभु को समस्त शक्तियों का स्वामी बताया है। हॉब्स ने ‘शक्ति-पृथक्करण’ तथा ‘मिश्रित सविधान’ की प्रखर आलोचना की है। समप्रभु ही देश की सेना,युद्ध तथा बाहरी संधियों का पालनकर्ता है।

हॉब्स के सम्प्रभु पर किसी प्राकृतिक, ईश्वरी तथा नैतिक कानुनों की बात लागू नहीं होती है। समस्त कानून, संपत्ति, परिवार, चर्च आदि की उत्पत्ति का स्त्रोत समप्रभु है। हॉब्स के अनुसार, व्यक्ति साध्य(End) है तथा राज्य साधन(Mean) है। राज्य एक कृत्रिम संस्था है जिसे व्यक्तियों ने अपने हितो की रक्षार्थ बनाया है।

सेबाइन ने हॉब्स को ‘व्यक्तिवाद का प्रथम दार्शनिक’ बताया है। उसने ही व्यक्ति के जीवन के अधिकार को सर्वप्रथम मान्यता दी।

हॉब्स की इस विचारधारा में राज्य (संप्रभुता) निरंकुश है।

हॉब्स की प्रमुख कृतियां:-

  • 1⃣ डि’ सिवे (1642)
  • 2⃣ डि’ कारपारे (1655)
  • 3⃣ लेवियाथन (1651)
  • 4⃣ एलिमेंटस ऑव लॉ (1650)
  • 5⃣ डी’ होमीने (1659)

लेवियाथन पुस्तक 1651 इसके बारे में मुख्य तथ्य:-

  • ? यह फ्रांसीसी गोल्डाफिन को समर्पित है।
  • ? पोलिंगवुड ने लेवियाथन से प्रभावित होकर न्यू लेवियाथन नामक पुस्तक लिखी।
  • ? क्लैरेण्डन लेवियाथन पुस्तक को जला देता है।
  • ? माइकेल आँकशाँट – इसे अंग्रेजी की सर्वश्रेष्ठ रचना कहता है ।
  • ?सी ई वाहन के अनुसार – लेवियाथन समस्त कानून व्यवस्था को निष्फल बना देती है।

व्हाइट हाँल के अनुसार लेवियाथन पुस्तक पर निम्न विचार करता है –

  1. सांप के समान जहर से भरी हुई है।
  2. विद्रोही की प्रश्नोत्तरी है।
  3. POP लीला का षड्यंत्र है ।

ब्रेमहिम के अनुसार –

  • इसे कुत्तों का तमाशा कहते हैं ।
  • नील नदी भी समुद्री तट पर इतना कूड़ा-करकट लेकर नहीं आती जितना लेवियाथन लेकर आता है।

काउले – मेल्सबरी के सिद्धांत से लेवियाथन से ज्यादा आशा नहीं की जाती है।

विली – वह झगड़ालू प्रवृत्ति का शिष्य था

हाँब्स की धारणा है कि अधिकार कानून गत ही प्राप्त हो सकते हैं हॉब्स मानव प्रकृति में दो तत्व इच्छा तथा विवेकल्पना करता है हाँब्स के अनुसार प्राकृतिक कानून विवेक का ही आदेश होता है थॉमस हॉब्स ने 19 प्राकृतिक ती कानूनों को गिनाया है

हाँब्सस पहला दार्शनिक था जिसने प्राकृतिक अधिकारों तथा प्राकृतिक कानूनों में स्पष्ट भेंद किया था

डनिगग ने लिखा है कि हाँब्स के सिद्धांत में राज्य की शक्ति का उत्कर्ष होते हुए भी उस का मूलाधार पूर्ण रुप से व्यक्तिवादी है

व्यक्तिवाद संबंधी विचार हाब्स के:-

सेबाइन :- हाब्स को प्रथम व्यक्ति वादी विचारक कहता है और इसके पक्ष में निम्नलिखित तर्क देता है :-

  1. सभी व्यक्तियों को समान मानता है ।
  2. राज्य को कृत्रिम संस्था मानता हैअर्थात राज्य की उत्पत्ति सामाजिक समझौते के माध्यम से मानता है ।
  3. वह व्यक्ति को आत्मरक्षा का अधिकार देता है ।

परंतु हाब्स के विचारों में मूल लक्षण नैतिकता, विवेकशीलता नहीं पाया जाता है इसलिए हम हाब्स को प्रथम व्यक्ति वादी विचारक न मानकर जॉन लॉक को मानते है।

हाब्स मानव प्रकृति संबंधी विचार :-

?हाब्स अपनी पुस्तक लेवियाथन 1651 में वैज्ञानिक भौतिकवाद के आधार पर मानव प्रकृति संबंधी विचार प्रस्तुत करता है।

? वह मानव प्रकृति को आत्मरक्षण की मूल प्रवृत्ति के आधार पर असामाजिक ,अनैतिक प्राणी बताता है, जो शक्ति व भय से संचालित होता है वह अहम परवर्ती होगी ।

? मानव प्रकृति के बारे में हाब्स का कथन है:- स्वयं को पढ़ो ।

?मानव प्रकृति के बारे में हाब्स का प्रसिद्ध कथन है :-मानव प्रकृति वैसी ही है जैसी मैं बताता हूं ।

?हाब्स अपनी पुस्तक लेवियाथन 1651 में मानव प्रकृति के पांच लक्षणो की चर्चा करता है :-जो इस प्रकार है एकांकी, दीन-हीन ,पापी ,पार्श्विक ,क्षणभंगुर ।

?मानव प्रकृति के आधार पर हॉब्स निरंकुश राजतंत्र का समर्थन करता है।

Thomas Hobbes Important facts-

  • हाँब्स अरस्तु से भिन्न अपने सिद्धांत की शुरुआत राज्य से नहीं व्यक्ति से करता है
  • हार्मोन के अनुसार हाँब्स का शासन जनता है व्यक्ति के लिए है
  • राजवंश के समर्थक हाँब्सस के ग्रंथ लेवियाथन को राजद्रोह की भावना वाला मानते हैं
  • लोकतंत्र वादियों का मत था कि हाँब्स व्यक्ति की स्वतंत्रता का शत्रु है
  • हाँब्स के वैज्ञानिक भौतिकवाद में गंभीर दोष और इसे भानुमती का पिटारा कहते हैं

 

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