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पारिस्थितीकी पर्यावरण अध्ययन का वह भाग है जिसमे हम जीवो, पौधो और जन्तुओं और उनके संबंधो या अन्य जीवित या गैर जीवित पर्यावरण पर परस्पराधीनता के बारे मे अध्ययन करते है

पारिस्थितिकी दो शब्दों से मिल कर बना है जो ग्रीक शब्द “ Oekologue” से लिया गया है

  • (a) ‘Oekos’ का अर्थ घेराव/ आस पास का क्षेत्र
  • (b) ‘Logs’ का अर्थ एक पूरे पारिस्थितिकी पर अध्ययन मतलब ‘घेराव /आस पास का अध्ययन’

पारस्थितिक अध्ययन मे शामिल है:

  • यह वातावरण मे ऊर्जा और पदार्थो के प्रवाह के अध्ययन से संबन्धित है
  • यह प्रकृति के अध्ययन और इसके क्रियाकलाप से संबन्धित है
  • यह पर्यावरण के जैविक और अजैविक घटको केबीच विभिन्न पदार्थों के आदान प्रदान से संबन्धित है। उदाहरण: भू जैव रासायनिक चक्र।

“पारिस्थितिकी” शब्द (“Okologie”) का आविष्कार जर्मन वैज्ञानिक अर्नस्ट हैकेल (1834-1919) ने 1866 मे किया। 

पारिस्थितिक तंत्र के मुख्यतः दो प्रकार के संघटक होतें है –

  1. जैविक कारक
  2. अजैविक कारक

1. जैविक कारक

  • जन्तु समुदाय
  • वनस्पति समुदाय
  • सूक्ष्मजीव
  • मनुष्य

2. अजैविक कारक

  • प्रकाश
  • ताप
  • आर्द्रता
  • हवा
  • स्थलाकृति
  • मृदा

पारिस्थितिक तंत्र , पर्यावरण, भूगोल, मानव पारिस्थितिकी, जैव भूगोल

पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी की समस्या विश्व समुदाय के समक्ष एक चुनोती बनकर उभरी है। विश्व के सभी देश इस चुनोती से निपटने के लिए प्रयास कर रहे है संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी इसके लिए अनेक कदम उठाये है। ये समस्या से निपटने के भारत मे विश्व समुदाय के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है। भारत का पर्यावरण एवं वन विभाग इस कार्य मे उल्लेखनीय भूमिका अदा करता है

1972 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत राष्ट्रीय पर्यावरण आयोजना एवं समन्वय समिति (NCEPC) का गठन किया गया अद्रभूमि की पहचान तीन तत्त्वों पर निर्भर करती है।

  • 1⃣ जब कोई क्षेत्र स्थायी रूप से या समय समय पर जलमग्न रहता है।
  • 2⃣ जब कोई हैडरीक जल में पैदा होने वाली वनस्पतियो के बढ़ाने में मददगार होता है।
  • 3⃣ जब किसी क्षेत्र में हाइड्रेट मिट्टी के लंबे समय तक संकुचित रहने से ऊपरी परत निरपेक्ष हो जाती है।

पारिस्थिकीय सन्ुलन के सरंक्षण और पुनर्स्थापना द्वारा पर्यावरण संतुलन को बनाये रखना । प्राकतिक सम्पदा का संरक्षण। राष्ट्रीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वन उत्पादों में व्रद्धि।

वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दों पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हाल ही में नई दिल्ली में किया गया

इसमें निम्नलिखित मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया:

  • पर्यावरणीय क्षति और जलवायु परिवर्तन ऐसे मुद्दे हैं जो आज मानव सभ्यता के समक्ष सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हैं।
  • मानवता और पृथ्वी का अस्तित्व बनाए रखने के लिए पर्यावरण
  • जलवायु परिवर्तन का खतरा एक गंभीर वैश्विक चिंता है।

भूमंडलीय तापन

ग्लोबल वार्मिंग कहा जाता है। औद्योगिक क्रांति के बाद से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, मीथेन, क्लोरोफ्लोरो कार्बन, हाइड्रोकार्बन आदि ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा में वृद्धि हुई है।

ग्रीन हाउस प्रभाव उत्पन्न करने की तीव्रता क्लोरोफ्लोरोकार्बन में सर्वाधिक होती है,परंतु भूमंडलीय तापन अर्थात ग्लोबल वार्मिंग के लिए कार्बन डाइऑक्साइड जिम्मेदार है। यदि वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा इसी तरह बढ़ती रहे तो 1900 की तुलना में 2030 ईस्वी में विश्व के तापमान में 3 सेंटीग्रेड की वृद्धि हो जाएगी।

ओजोन छिद्र

ओजोन परत में छेद सर्वप्रथम फोरमैन द्वारा 1973 ईस्वी में अंटार्कटिका देखा गया। अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन परत के लक्षण सितंबर-अक्टूबर के दौरान देखे जा सकते हैं। ओजोन परत की सघनता या सांद्रता डाब्सन मीटर से मापी जाती है।

ओजोन परत में छिद्र होने का प्रमुख कारण क्लोरीन है। इसकी उत्पत्ति क्लोरोफ्लोरोकार्बन(CFC), हाइड्रोकार्बन(HFC), हैलोजंस, कार्बन टेट्राक्लोराइड, क्लोरो ब्रोमाइड जैसे रसायनों से होती है।

वैज्ञानिकों के अनुसार क्लोरीन का एक अणु ओजोन के एक लाख अणुओं को तोड़ सकता है। रेफ्रिजरेशन एयर कंडीशन स्केनर प्लास्टिक आदि ने ओजोन परत को बहुत क्षति पहुंचाई है।

ओजोन परत में बढ़ते छिद्र को रोकने के लिए 1987 ईस्वी में मॉन्ट्रियल, कनाडा में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया 16 सितंबर को पूरे विश्व में ओजोन दिवस के रुप में मनाया जाता है।

अम्लीय वर्षा ( Acid rain )

हमारी प्रकृति में वर्षा ईश्वर की देन मानी जाती है जब बारिश होती है तो बिजली कड़कने के कारण नाइट्रोजन जल से क्रिया करके नाइट्रिक अम्ल बनाता है जो एक प्राकृतिक अम्लीय पदार्थ है यह अम्लीय पदार्थ पेड़-पौधों विशेषकर धान की फसलों के लिए अत्यंत आवश्यक है (इसके कारण हम वर्षा को अम्लीय वर्षा नहीं बोल सकते हैं)

अब चलते हैं अम्लीय वर्षा के कारणों पर- जब प्रकृति में अर्थात पृथ्वी पर फॉसिल फ्यूल अर्थात पेट्रोलियम जैसे पदार्थ जलाए जाते हैं तब सल्फर डाइऑक्साइड और सल्फर ट्राई ऑक्साइड गैस निकलती है जो जल से क्रिया करके बादलों में सल्फ्यूरिक अम्ल का निर्माण कर देती है

वायुमंडल में सल्फर डाइऑक्साइड,नाइट्रोजन के ऑक्साइड,क्लोरीन व फ्लोरिंग जैसे हेलोजन पदार्थों के मिलने जाने से वर्षा के जल का PH 5.6 से कम हो जाता है वर्षा में सल्फ्यूरिक अम्ल,नाइट्रिक अम्ल, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल। 

इसका प्रभाव वनस्पतियों के क्लोरोफिल पर पड़ता है। इसे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया बाधित होती है। पत्तियां पीली पड़ने लगती है।

ऐसा जल जब ताजमहल पर पड़ता है तो ताजमहल पीला हो जाता है (एक उदाहरण)

कृषि योग्य भूमि को अम्लीय बना देता है त्वचा पर पढ़ते ही त्वचा जन्य रोग हो जाते हैं अम्लीय वर्षा को कम करने का कोई भी उपाय नजर नहीं आ रहा है इसको कम करने का सबसे बड़ा और असरदार उपाय एक ही है वायुमंडल में सल्फर डाइऑक्साइड गैस की मात्रा को कम कर दिया जाए ऐसा तभी संभव है जब हम लोग ऊर्जा के गैर परंपरागत स्रोतों की ओर ध्यान दें और फॉसिल फ्यूल का इस्तेमाल ना के बराबर किया जाए

जैव विविधता ( Biodiversity )

जैव विविधता पृथ्वी या किसी विशेष क्षेत्र में पाई जाने वाली जीव जंतु एव वनस्पतियों की विविधता है जो जैविक समुदाय की समग्रता को बताता है। जैव विविधता सम्बन्धता ,जैविक सम्पदा या जैव संसाधन का प्रतीक हैं।पारिस्थितिकी सन्तुलन के लिए जैव विविधता का होना आवश्यक है।

जिस क्षेत्र में जैव विविधता अधिक होती है वह खाद्य श्रृंखला ,खाद्य जाल सन्तुलित होता है और जैविक प्रजातियों की प्राकृतिक प्रजनन क्षमता अधिक विकसित होती है।

जैव विविधता सम्पन्नता की स्थिति में जैविक प्रजातियों के मध्य खाद्य जाल के ये संघर्ष कम होता है।फलस्वरूप अस्तित्व का संकट उत्पन्न नही होता । जैव विविधता शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग वाल्टर जी०रोजेन द्वारा 1986 में किया गया ।

हॉटस्पॉट

एक जैव विविधता वाला हॉटस्पॉट ऐसा जैविक भौगोलिक क्षेत्र है जिसे मनुष्यों से खतरा रहता है। विश्व भर में ऐसे 36 आकर्षण के केन्द्र हैं इन केन्द्रों में विश्व के 60 प्रतिशत पौधों, पक्षियों, स्तनपाई प्राणियों, सरीसृपों और उभयचर प्रजातियों का संरक्षण किया जाता है।

प्रत्येक आकर्षण का केन्द्र आज खतरे के दौर से गुजर रहा है। और अपने 70 प्रतिशत मूल प्राकृतिक वनस्पति को खो चुका है।

 

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Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

शाहीन कोटा,  P K Nagauri, चित्रकूट त्रिपाठी श्रीगंगानगर, प्रभुदयाल मूण्ड चूरु, 

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