निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व

निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व का अर्थ और विशेषताए | प्रबंधन के कार्य

निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व का अर्थ समाज की भलाई, आवश्यकताओं एवं मूल्यों के संदर्भ में व्यवसाय द्वारा निर्वहन करने योग्य जिम्मेदारी है। किसी भी व्यवसाय का लंबे समय तक स्थापित रहना एवं वृद्धि करने की प्रक्रिया तभी जारी रह सकती है जब वह समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन भी अच्छे तरीके से करें। व्यवसाय केवल आन्तरिक दृष्टि से ही लोकतंत्र के सिद्धांतों का पालन न करें वरन् अपने सामाजिक पर्यावरण के प्रति भी लोकतांत्रिक स्वरूप को ग्रहण करें।

निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व की विशेषताएं-

  1. ग्राहकों को बेहतर वस्तुएं व सेवाएं प्रदान करना।
  2. व्यवसाय में बाल श्रम को रोकना
  3. महिलाओं, विकलांगों एवं वृद्ध कार्मिकों के लिए उनकी शारीरिक स्थिति के अनुसार कार्य दशाएं उपलब्ध करवाना।
  4. कार्यस्थान को स्वास्थ्य एवं सुरक्षा की दृष्टि से सुप्रबंधित करना।
  5. पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वाली तकनीकों को उद्योगों में प्रोत्साहन देना।
  6. संसाधनों का उपयोग इस तरह से करना कि धारणीय विकास की अवधारणा फलित हो सके।
  7. सामाजिक लेखा परीक्षण की पद्धतियों को लागू करना।
  8. व्यवसाय में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व, भागीदारी आदि सिद्धांतों को लागू करना।
  9. व्यवसाय के लिए निर्धारित कानूनों एवं मानदंडों का सुव्यवस्थित तरीके से पालन करना।

Must Read – प्रबंधन का अर्थ, परिभाषाएं, अवधारणा और विशेषताए | Management | लोक-प्रशासन

निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व की अवधारणा के प्रेरक-

  1. व्यवसाय में लगे कार्मिकों का अपने अधिकारों के प्रति शिक्षित एवं जागरूक होना।
  2. उपभोक्ताओं का शिक्षित, जागरूक एवं विभिन्न कानूनों के द्वारा प्रदत्त शक्तियों के द्वारा सशक्त बनना।
  3. सरकारी नियमों, कानूनों एवं विनियमों के माध्यम से व्यवसाय पर नियंत्रण करना।
  4. व्यवसायिक लाभ एवं सामाजिक हित के परस्पर पूरक होने वाली अवधारणा का बलवती होना।
  5. व्यवसाय की सामाजिक रुप से प्रासंगिकता एवं स्वीकृति प्राप्त करने की चाह।
  6. व्यवसाय की ओर अधिक नियंत्रणकारी एवं नियमनकारी कानूनों का सरकार द्वारा न बनाए जाने की व्यवसायिक वर्ग की सोच व इच्छा।

ये भी पढ़े – नियंत्रण का क्षेत्र – संगठन के सिद्धांत लोक प्रशासन | Control Area in Organization

भारत में कंपनी कानून 2013 के विभिन्न प्रावधान-

  1. व्यवसाय के अंतर्गत स्वतंत्र निदेशकों की संख्या बढ़ाना।
  2. निदेशकों के वेतन की सीमा निर्धारित करना।
  3. एक व्यक्ति के निदेशक नियुक्त होने के लिए कंपनियों की संख्या निश्चित करना।
  4. व्यवसायिक घोटालों के लिए विशेष न्यायालय गठित करने का प्रावधान।
  5. बड़ी कंपनियों को अपने लाभ का 2% सामाजिक उत्तरदायित्व पर खर्च करना होगा।

सीएसआर से संबंध अनिल बैजल समिति फरवरी 2015 में बनाई गई थी जिसने अपनी रिपोर्ट अक्टूबर 2015 में सौंपी थी। भारत 2014 में ऐसा पहला देश बना जिसने कुछ विशेष वर्ग की कंपनियों के लिए सीएसआर गतिविधियों को अनिवार्य किया था।

नीचे दिए गए महत्वपूर्ण Notes & Test Series को जरूर पढ़ें –

Specially thanks to – P K Nagauri

आपको हमारा प्रयास कैसा लगा Comment करके जरूर बताये – धन्यवाद

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *